इलाहाबाद (ब्यूरो)। कृष्ण, एक प्रेमी, एक योगी, एक सखा, एक संहारक, एक पालनहार, एक राजा, एक मार्गदर्शक। कृष्ण के जितने भी रूपों की व्याख्या काव्यों, ग्रंथों और उपनिषदों में की गई है, तकरीबन हर एक रूप को इलाहाबाद संग्रहालय में लगी लघुचित्रों की प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है। हर रंग-रंग कृष्ण की कहानी कह रहा है। तंजौर शैली में सोने और कुंदन के प्रयोग के साथ बनाई गए कृष्ण के चित्र सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
इनमें कृष्ण आपको राधा के साथ खेलते, वार्तालाप, उनके बालों को संवारते और होली खेलते हुए दिखाया गया है तो वहीं ग्वालों के साथ गाय चराते, गोपियों के साथ रासलीला करते बखूबी प्रदर्शित किया गया है। कृष्ण और ब्रह्म संवाद, कृष्ण के पूतना वध, अक्रूर वध और कृष्ण के मथुरा में शासन करते बेहद आकर्षक अंदाज में प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय निदेशक राजेश पुरोहित का कहना है कि हमारी कोशिश है कि हम अपने संग्रह के जरिए कृष्ण के हर रूप से लोगों को रूबरू करा सकें। प्रदर्शनी में तकरीबन 75 लघुचित्रों को प्रदर्शित किया गया है। खास यह कि यह लघुचित्र हजारों वर्ष पुराने 18वीं, 19वीं और 20वीं शताब्दी के राजस्थानी, तंजौर, पहाड़ी और पित्तर शैली में हैं।