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मंत्रोच्चारण नहीं क्रांति गीत के साथ हुई शादी

Wed, 08 Feb 2017 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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कहीं दूल्हा हेलीकॉप्टर से शादी के लिए पहुंचता है तो किसी की हसरत चांद पर शादी रचाने की है, लेकिन चकाचौंध से दूर मंगलवार को एक शादी ऐसी भी हुई, जहां मंत्रोच्चारण की जगह क्रांति गीत गाए गए। शादी में परिचर्चा के साथ एक नई परंपरा का सृजन भी किया गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रहे पवन और उड़ीसा की शिल्पी की इस अनोखी शादी में परंपराओं में परिवर्तन की आहट सुनाई दी।
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विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे पवन की शादी के प्रति भी क्रांतिकारी सोच दिखाई दी। वर्तमान में मध्य प्रदेश के एक स्वयंसेवी संगठन से जुड़े पवन की काम के सिलसिले में ही उड़ीसा की शिल्पी से मुलाकात हुई। दोनों के विचार मेल खाए और बात शादी तक पहुंच गई। दोनों ने पुरानी रीतियों और परंपराओं को तोड़ते हुए सादगी से शादी की। परिवारवालों ने भी साथ दिया। आईईआरटी के पास स्थिति एक मकान में एक-दूसरे को जयमाल डालकर पवन और शिल्पी ने शादी की। नाच-गानों की जगह क्रांति गीत गाए तो अन्य साथियों ने कबीर के ‘मोको कहां ढूढ़े बंदे’, ‘हमन है इश्क मस्ताना’ समेत कई दोहों की प्रस्तुति दी।

इसी क्रम में ‘प्रेम, परंपरा और विद्रोह’ विषय पर परिचर्चा भी हुई। विवाह स्थल भी झालर और झूमर की जगह स्लोगन वाले पोस्टर से सजे थे। पवन का कहना है कि शादी की कई परंपराओं और रीतियों का औचित्य समझ में नहीं आता। इसमें परिवर्तन की जरूरत महसूस की जा रही है। शिल्पी का कहना है कि पवन के विचारों की वह कद्र करती हैं। यही उनके भी विचार हैं। अन्य साथियों से विचार के बाद इस तरह से शादी का निर्णय लिया गया।
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