हाॅकी खेलना शुरू किया तो स्टिक के भी नहीं थे पैसे
तकरीबन एक दशक पहले सन 2013 में अली खान हॉकी के खेल में कुछ कर गुजरने का सपना लेकर पीडीए के त्रिवेणीपुरम मैदान पर हॉकी कोच विजय सिंह के पास पहुंचा था। तब उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह हॉकी की स्टिक खरीद सके, लेकिन कोच विजय ने किशोरवस्था में ही उसकी आंखों में पल रहे सपने को पहचाना और उसे तराशने का निर्णय लिया।
फिर अपने पैसे से अली खान को हॉकी खरीदकर दी। फिर उन्होंने हॉकी गोलकीपर की पूरी कीट मुहैया कराई थी। मां शबीना बेगम ने बताया कि बेटे ने इस दिन के लिए कड़ी मेहनत की है। बहन दरक्शा, हुमैरा और अक्सा ने बताया कि भाई अली के टीम इंडिया में चयन से वह बेहद खुश हैं। बड़े भाई फैजान खान भी अली की सफलता पर फूले नहीं समा रहे थे।