रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने देश में नॉलेज कॉरिडोर (ज्ञान गलियारा) विकसित करने का आह्वान किया। नॉर्थ टेक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि जिस तरह डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर रक्षा उत्पादन की दिशा बदल रहा है, उसी तर्ज पर एक ऐसा बौद्धिक ढांचा तैयार करने की आवश्यकता है जहां वैज्ञानिक, उद्योग जगत और सैन्य विशेषज्ञ अपनी विशेषज्ञता को एक-दूसरे के साथ साझा कर सकें।
रक्षा मंत्री ने कहा, उभरते और अनछुए तकनीकी क्षेत्रों में सामूहिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए यह नॉलेज कॉरिडोर मील का पत्थर साबित होगा। देश की बढ़ती आर्थिक और सामरिक शक्ति का ब्योरा देते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए ऐतिहासिक रहा है। इस दौरान घरेलू रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सबसे उत्साहजनक पहलू रक्षा निर्यात रहा, जिसने 38,424 करोड़ रुपये की नई ऊंचाइयों को छुआ है।
राजनाथ सिंह ने भरोसा जताया कि यह वृद्धि आने वाले समय में और भी तीव्र होगी। दुनिया भर की विदेशी कंपनियां अब भारतीय रक्षा उद्योगों के साथ साझेदारी करने के लिए उत्सुक हैं। तकनीकी हस्तांतरण को सुगम बनाने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि डीआरडीओ ने अब तक विभिन्न उद्योगों को 2200 से अधिक प्रोद्योगिकी हस्तांतरित की हैं। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और पेटेंट तक मुफ्त पहुंच प्रदान की गई है।
रक्षा अनुसंधान बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत के लिए आरक्षित किया गया है। अब तक 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं, जो न केवल निवेश ला रही हैं बल्कि भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता को भी नई ऊर्जा दे रही हैं। उन्होंने सिंपोजियम की थीम ‘ रक्षा त्रिवेणी संगम’ की सराहना भी की।
इस अवसर पर थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, मध्य वायु कमान के एयर मार्शल बालकृष्णन मणिकांतन, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एसआईडीएम के अध्यक्ष अरुण टी रामचंदानी, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर रामकृष्णन एस आदि मौजूद रहे।