इलाहाबाद। जिनकी जिंदगी में रोशनी की कमी है, उन्हें ज्ञान के उजियारे से पूरा करना ही उनका मकसद है। टैगोर टाउन की हरदीप दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि में ऐसी ही किताबें लिखने में जुटी हैं, जिनसे उनकी जिज्ञासाएं शांत हों और उन्हें ज्ञान मिले। किताबें लिखने के साथ ही वह जनमानस को नेत्रदान के लिए भी प्रेरित करती हैं। उनकी समाज सेवा के लिए ही बीते वर्ष प्रदेश सरकार ने उन्हें मलाला पुरस्कार से नवाजा।
हरदीप कहती हैं, महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करना मेरा लक्ष्य है। एक बार अरुणिमा विद्यालय जाने और वहां दृष्टिबाधित बच्चों से मिलने के बाद ही मेरा मन बदल गया। मैंने फैसला किया कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए ही काम करूंगी। फिर ब्रेल लिपि शिक्षक हामिद से ब्रेल लिपि सीखी और उसमें काम करना शुरू किया। दृष्टिबाधित बच्चों को स्कूली पाठ्यक्रम की किताबें तो मिलती हैं लेकिन इससे इतर किताबें पढ़ने का मौका नहीं मिलता। इसीलिए मैंने अलग विषयों पर भी लिखने का मन बनाया।
इसके बाद तो हरदीप ने ब्रेल टाइपराइटर से कोर्स से जुड़ी किताबों से इतर किताबें भी लिखीं। इसके तहत वह अब तक गीता सार, हनुमान चालीसा, मोदी-एक जीवनी, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गान का इतिहास, लुईस ब्रेल, दुनिया की दस नेत्रहीन महान हस्तियों पर भी ब्रेल लिपि में किताबें लिख चुकी हूं। इतना ही नहीं वह स्कूलों में जाकर ऐसी किताबों को विद्यार्थियों के बीच नि:शुल्क बांटती भी हैं।
ब्रेल बुक्स लाइब्रेरी की ख्वाहिश
हरदीप की ख्वाहिश है कि दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल किताबों की लाइब्रेरी बने ताकि वे भी अलग-अलग संदर्भों की किताबें पढ़ सकें। अब तक शहर में ब्रेल किताबों की कोई लाइब्रेरी नहीं है। लाइब्रेरी बनने पर दृष्टिबाधित बच्चे भी यहां आकर मुफ्त में किताबें पढ़ सकेंगे।
नेत्रदान के प्रति करती जागरूक
हरदीप दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेललिपि में किताबें लिखने के साथ ही लोगों को नेत्रदान के प्रति भी जागरूक करती हैं। इसके लिए वह फार्म भी भरवा रही हैं जिससे आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा नेत्रहीन यह खूबसूरत दुनिया देख सकें।