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किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण का जीवन संघर्ष, पढ़ें उनके बारे में सबकुछ

Thu, 24 Jan 2019 10:41 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Laxmi Narayan tripathi
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प्रयागराज की पावन धरती पर कुंभ मेले का भव्य शुभारंभ 15 जनवरी से गया है, मेले में देश भर के साधु-सन्तों का जमवाड़ा लगा हुआ है। वैसे तो मेले में 13 अखाड़ों के तमाम साधु-संत लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन इन सब से अलग 14वें अखाड़ें के रूप में इस बार आया किन्नर अखाड़ा दिव्य कुंभ में काफी सुर्खियों में है।

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हलांकि, किन्नर अखाड़े को अखाड़ा परिषद व अन्य सनातनी अखाड़ों ने मान्यता नहीं दी, लेकिन सबसे बड़े जूना अखाड़े ने सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक रूप से उपेक्षित किन्नर समुदाय को अपनाकर एक मिशाल पेश की और सनातन संस्कृति के इतिहास को दुहराया कि इस संस्कृति में किन्नरों का भी कभी स्थान रहा है।

Laxmi Narayan tripathi
कुंभ में पहली बार शामिल हुए किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि किन्नर समाज के उपेक्षित सन्तों के हक की लड़ाई लड़े और अखाड़े में जगह बनाए हैं। आचार्य लक्ष्मी नारायण कहती हैं कि, 'तिरस्कार, कटाक्ष और अवहेलना सहने के बाद हमें अन्य अखाड़ों के सन्तों से अलग वासुदेवा नंद सरस्वती और जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरी महाराज जी ने सम्मान के साथ अपनाया। हरि गिरी महाराज ने कहा कि आप हमारी सनातनी पूंजी हो इसलिए हम आपको जूना अखाड़े में ससम्मान शामिल करते हैं।'
 

Laxmi Narayan tripathi
लक्ष्मी नारायण बताती हैं कि जूना अखाड़े को जो भी गलत बोलेगा हम किन्नर उसे नहीं छोड़ेंगे। जूना अखाड़े से मिला सम्मान पूरे विश्व के किन्नरों का सम्मान है। किन्नर समाज को मिला यह धार्मिक, सामाजिक सम्मान उन लोगों के लिए जोरदार तमाचा है जो हमारे धर्म को रूढ़िवादी कहते हैं।  किन्नर अखाड़े को कुंभ का हिस्सा बनाने के पीछे भी उनकी मंशा किन्नरों को समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने की है। उनका कहना है, जब हर कोई हमसे आशीर्वाद और दुआ लेता है तो समाज में किन्नरों के लिए सम्मानजनक स्थान क्यों नहीं है?
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कौन हैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी?
लक्ष्मी का जन्म महाराष्ट्र के ठाणे के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने मिठिबाई कॉलेज से आर्ट्स में डिग्री ली और भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। छोटी उम्र में ही समाज ने उन्हें अलग होने का अहसास दिलाना शुरू कर दिया था, फिर लक्ष्मी की मुलाकात किन्नर अशोक राव कवि से हुई, जिन्होंने उन्हें नृत्य सीखने के लिए प्रेरित किया। बाद में लक्ष्मी ने केन घोष के म्यूजिक वीडियो में काम किया और वो कोरियोग्राफर बन गईं, पर लक्ष्मी का सफर यहीं नहीं थमा। वu मुंबई में बार डांसर बन गईं, इसके बाद मुंबई में डांस बार बंद किए जाने पर इसके विरोध में लक्ष्मी ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। यहां से उनकी नई पारी की शुरुआत हुई। उन्होंने किन्नरों के सम्मान के लिए कई मंचों से आवाज उठाई। लक्ष्मी नारायण 2008 में संयुक्त राष्ट्र के एशिया पैसिफिक सम्मलेन में प्रतिनिधित्व करने वाली पहली ट्रांसजेंडर हैं। वह कहती हैं कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में तीन साल काम किया है।

लक्ष्मी 'बिग बॉस' और 'सच का सामना' जैसे टीवी रियलिटी कार्यक्रमों में भी शिरकत कर चुकी हैं।
लक्ष्मी नारायण एक बेहतरीन मॉडल के रूप में कार्य भी कर चुकी हैं और कई फैशन शो में भी जलवा बिखेरा है। लक्ष्मी नारायण को कई भाषाओं का ज्ञान भी है वे हिन्दी, मराठी, गुजराती, बांग्ला, अंग्रेजी, जर्मन और फ्रेंच जैसी भाषाओं की अच्छी ज्ञाता हैं। 
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