यह जानकारी किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित अपने शिष्य के आवास पर दी। महाकुंभ के तहत जूना अखाड़ा के नगर प्रवेश में शामिल होने के दूसरे दिन उन्होंने जूनागढ़ के महामंडलेश्वर गर्गाचार्य स्वामी महेंद्रानंद गिरि और जूनागढ़ की महामंडलेश्वर स्वामी जय अंबे गिरि के साथ अखाड़े के विस्तार और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार पर विस्तार से चर्चा की।
पंच दशनाम जूना अखाड़े से संबद्ध किन्नर अखाड़ा आठ देशों में विस्तार करने जा रहा है। महाकुंभ में आठ देशों के दो सौ से अधिक ट्रांसजेंडर किन्नर अखाड़े में शामिल होंगे। उन्हें धर्म -ध्वजा के नीचे संन्यास दीक्षा प्रदान की जाएगी। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। संन्यास दीक्षा ग्रहण करने के बाद यह ट्रांसजेंडर अपने-अपने देशों में किन्नर अखाड़े के लिए काम करेंगे।
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यह जानकारी किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित अपने शिष्य के आवास पर दी। महाकुंभ के तहत जूना अखाड़ा के नगर प्रवेश में शामिल होने के दूसरे दिन उन्होंने जूनागढ़ के महामंडलेश्वर गर्गाचार्य स्वामी महेंद्रानंद गिरि और जूनागढ़ की महामंडलेश्वर स्वामी जय अंबे गिरि के साथ अखाड़े के विस्तार और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार पर विस्तार से चर्चा की।
आचार्य महामंडलेश्वर ने बताया कि देश के सभी राज्यों में किन्नर अखाड़ा का गठन हो चुका है। सभी प्रदेशों में जगदगुरू,महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, महंत, पीठाधीश्वर, श्रीमहंत बनाए जा चुके हैं। इस क्रम में अब मलयेशिया, थाईलैंड, बैंकाक, सिंगापुर, यूएसए, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस के दो सौ से अधिक ट्रांसजेंडर उनके संपर्क में हैं और वह अखाड़े में शामिल होना चाहते हैं। ऐसे ट्रांसजेंडर चाहते हैं कि किन्नर अखाड़े का गठन विदेश में हो।
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इस पर निर्णय लिया है कि महाकुंभ में सभी ट्रांसजेंडरों को बुलाया जाएगा। उनको किन्नर अखाड़ा दीक्षा प्रदान की जाएगी। आचार्य महामंडलेश्वर ने बताया कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए किन्नर संत जोर शोर से लगे हैं।बड़ी संख्या में जो लोग सनातन धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में चले गए थे, उनकी वापसी भी हो रही है। घर वापसी करने वालों का किन्नर अखाड़े में स्वागत किया जा रहा है। जो जिस योग्य है उसको वैसी जिम्मेदारी भी दी जा रही है।