शिवकुमार के जरिए किय था खेल
साथ ही कई अहम बातों का खुलासा भी किया। बताया कि बलीपुर, हंडिया का प्रॉपर्टी ब्रोकर शिवकुमार पटेल उसके संपर्क में था और उसके ही जरिए उसने यह खेल किया। बताया कि शिवकुमार के कहने पर हंडिया में दुष्कर्म का केस दर्ज कराने वाली महिला ने 164 के बयान में फर्जी तरीके से कर्नलगंज में दर्ज केस के गवाह का नाम बतौर आरोपी लिया। यह भी बताया कि फूलपुर में दर्ज फर्जी केस के पीछे भी शिवकुमार का ही हाथ था। सीओ कर्नलगंज अजीत सिंह चौहान ने बताया कि शिवकुमार की तलाश में टीमें लगा दी गई हैं।
पांच हजार रुपये देने की कही बात
पूछताछ में आरोपी मदन यादव ने पुलिस से कहा कि उसने गवाह को फर्जी तरीकेसे जेल भेजवाने के लिए शिवकुमार को महज पांच हजार रुपये दिए थे। इससे पहले फूलपुर में दर्ज केस के बाबत उसका कहना था कि उसकेलिए उसने ढाई हजार रुपये दिए थे लेकिन इस केस में एफआर लग गई थी। यह पूछने पर कि आखिर पुलिसकर्मी इस फर्जीवाड़े में क्यों शामिल हुए, उसका कहना था कि उसकी परेशानी देखकर और एक ही जाति का होेने केचलते पुलिसकर्मियों को उस पर रहम आ गया और उन्होंने उसकी मदद के लिए ऐसा किया। हालांकि पुलिस अफसरों का मानना है कि वह अभी सच नहीं बोल रहा है। ऐसे में यह राज बना हुआ है कि आखिर पुलिसकर्मी इतने बड़े फर्जीवाड़े में क्यों शामिल हुए।
पन्ना लाल सिपाही ले गया था गवाह को पकड़कर
पूछताछ में मदन यादव ने यह भी बताया है कि किस तरह गवाह को कचहरी के बाहर से उठाकर हंडिया ले जाया गया और फिर उसे फर्जी तरीकेसे जेल भेज दिया गया। बताया कि वह कोर्ट में तारीख पर गया था इसी दौरान उसे अपने केस का गवाह दिखा। इसकेबाद उसके जानकारी देने पर एसओजी का सिपाही पन्नालाल यादव गवाह को पकड़कर थाने ले गया। जहां कुछ देर रखने के बाद उसे अपनी टीम केअन्य लोगों की मदद से हंडिया ले जाकर इंस्पेक्टर को सौंप दिया। इसके बाद हंडिया पुलिस ने उसे फर्जी तरीके से जेल भेज दिया।
पुलिसकर्मियों की कब होगी गिरफ्तारी?
मामले के एक नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य आरोपी हंडिया के पूर्व इंस्पेक्टर बृजेश यादव व जार्जटाउन थाने के एसआई बलवंत यादव की भूमिका की जांच चल रही है। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी फर्द में शामिल सभी पुलिसकर्मियों ने पूर्व इंस्पेक्टर बृजेश यादव के खिलाफ बयान दिया है। उधर मामले में सस्पेंड किए गए पूर्व सर्विलांस प्रभारी संजय यादव समेत पांच अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच चल रही है।
सुलह के लिए दबाव बनाता रहा मदन यादव
उसने बताया कि उससे दुष्कर्म का आरोपी मदन यादव अपने पद व प्रभाव के चलते उसके साथ ही उसके गवाह, परिवारीजनों फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर अपने मुकदमे में सुलह के लिए दबाव बना रहा है। इसी के तहत उसने पहले फूलपुर में उसके भाई व गवाह पर दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराया।
इस मामले में एफआर लगने के बाद उसने हंडिया इंस्पेक्टर रहे बृजेश सिंह के साथ मिलकर उसके गवाह को हंडिया में दर्ज दुष्कर्म के मामले में फर्जी तरीके से जेल भेज दिया। यही नहीं आरोप यह भी है कि इसके अलावा भी उसके खिलाफ मदन यादव की तहरीर पर जार्जटाउन थाने में दो फर्जी मुकदमे लिखवा दिए। तहरीर में मांग की गई कि मदन यादव व इस साजिश में शामिल इंस्पेक्टर बृजेश सिंह, एसआई बलवंत यादव व अन्य लोगों पर विधिक कार्रवाई कर उसकी व उसके गवाह व परिवारीजनों की जान-माल की सुरक्षा की जाए।
कुल 14 धाराओं में लिखा गया केस
निलंबित इंस्पेक्टर-दरोगा व असिस्टेंट प्रोफेसर पर कुल 14 धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इनमें लोकसेवक का किसी व्यक्ति को क्षति पहुंचाने के आशय से कानून का उल्लंघन करना, लोकसेवक का क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचना, लोकसेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निर्देश की अवज्ञा करना, किसी व्यक्ति को दंड या किसी सपंत्ति की समपहरण से बचाने के आशय से लोकसेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना करना, किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करना समेत अन्य धाराएं शामिल हैं। जिनमें आपराधिक षडयंत्र और एससी-एसटी एक्ट भी शामिल है।
असिस्टेंट प्रोफेसर व इंस्पेक्टर एक ही गांव के
पीड़िता की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि उसके मुकदमे का आरोपी मदन यादव व निलंबित इंस्पेक्टर बृजेश सिंह दोनों गाजीपुर के करीमुद्दीनपुर गांव के रहने वाले हैं। इसी के तहत दोनों ने मिलकर यह साजिश रची, जिसमें अपने अन्य सहयोगियों को भी शामिल कर लिया। इसके साथ ही दबाव बनाने के लिए उसके गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजा और उस पर फर्जी केस भी दर्ज कराए।
कई अन्य पुलिसकर्मियों के भी आएंगे नाम
सूत्रों का कहना है कि भले ही मुकदमे में अभी दो ही पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है। लेकिन विवेचना के दौरान अभी कई अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आएंगे। गौरतलब है कि इस मामले में कुल आठ पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। इनमें पूर्व सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव, इंस्पेक्टर शिशुपाल शर्मा, एसआई महेश चंद्र निषाद, हेड कांस्टेबल पन्नालाल यादव, अजय यादव व कांस्टेबल केके यादव भी शामिल हैं। विवेचना निष्पक्ष ढंग से हुई तो साजिशकर्ताओं के रूप में इन पुलिसकर्मियों का नाम आना लगभग तय है।
अफसर क्यों बंद किए रहे आंखें
- इस प्रकरण में अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
- बड़ा सवाल यह है कि विवेचना में खेल होता रहा तो पर्यवेक्षण अफसरों को इसकी जानकारी कैसे नहीं हो सकी।
- फूलपुर में अगर विवेचना के दौरान मामला फर्जी पाया गया तो फिर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
- हंडिया में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 169 की रिपोर्ट भेजकर फर्जी तरीकेसे जेल भेजे गए गवाह को रिहा कराया गया, तो उसी समय इस फर्जीवाड़े का संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।