भारतीय जनता पार्टी ने केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाने से जहां उनका रुतबा बढ़ा, वहीं इलाहाबाद के परिप्रेक्ष्य में वह अब डा. मुरली मनोहर जोशी और पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के समकक्ष पहुंच गए हैं। या यूं कह ले इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के बाद वे इलाहाबाद में भाजपा के तीसरे बड़े नेता बनकर उभरे हैं।
अभी तक इलाहाबाद शहर कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा था। दरअसल देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, वीपी सिंह आदि ने लोकसभा में संगम नगरी का ही प्रतिनिधित्व किया, जबकि हेमवती नंदन बहुगुणा ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। इन चारों नेताओं के मुकाबले भाजपा यहां थोड़ी कमजोर साबित हुई थी। हालांकि पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी और पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ऐसे नेता रहे हैं जिनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर की रही है। डा. जोशी जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाल चुके हैं तो केशरी नाथ त्रिपाठी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा सिर्फ केशव प्रसाद मौर्य ही ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी बखूबी निभाई तो अब डिप्टी सीएम के रूप में वे इलाहाबाद को एक बार फिर से देश की राजनीति में अहम स्थान देने जा रहे हैं।
रविवार को प्रदेश का डिप्टी सीएम बनने जा रहे केशव प्रसाद मौर्य कनाडा के धर्म प्रचारक पीटर यांगरीन का विरोध करने की वजह से खासा सुर्खियों में आए थे। कनाडा के इस धर्म प्रचारक का नवंबर 2013 में केपी इंटर कालेज ग्राउंड में चंगाई सभा का एक कार्यक्रम था। तब केशव प्रसाद मौर्य ने विहिप नेता पवन श्रीवास्तव के साथ इस कार्यक्रम का पुरजोर विरोध किया। तब इलाहाबाद के आईजी रहे एंटनी देव कुमार से केशव मौर्य की तीखी बहस भी हुई। लगातार छह दिन तक चले आंदोलन के बाद केशव को गिरफ्तार कर लिया गया। तब उन्हें 41 दिन तक नैनी जेल में रहना पड़ा, जबकि विहिप नेता पवन श्रीवास्तव को 15 दिन बाद जेल से छोड़ दिया गया था।