इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद संग्रहालय, हिन्दी साहित्य सम्मेलन और मीरा फाउंडेशन के सहयोग से हिन्दी त्रैमासिक संवेद की ओर से शनिवार को ‘अपने समय की कविता’ की परत दर परत पड़ताल के लिए देश भर से नामचीन कवि जुटे तो कविता के फलक और सरोकारों पर भी पूरी साफगोई के साथ चर्चा की गई। दो दिनी उजास के पहले दिन प्रख्यात हिंदी कवि डॉ.केदारनाथ सिंह ने कविता के परिदृश्य की परत दर परत पड़ताल के साथ उसे समय और सरोकारों से जोड़ने का सुझाव भी दिया। कहा, हिंदी कविता की दृष्टि अखिल भारतीय हुए बिना उसके समक्ष खड़ी चुनौतियों, संकटों को दूर करना संभव नहीं। साहित्य की चिंताओं को राष्ट्रीय होना होगा। उसे उन चिंताओं को संबोधित करना होगा जो देश के अलग-अलग कोनों से उठ रही हैं। वस्तुत: कविता को जीवन को प्रस्तुत करने वाला बनाना होगा।
हिंदी कविता को अन्य भाषाओं की कविताओं की ओर भी देखना होगा। कवि और समाजविज्ञानी बद्री नारायण ने कहा कि कविता केंद्र पर नहीं बल्कि किनारों पर होती है। कविता को उन आवाजों को सुनाने की जरूरत है जो किनारे पर पहुंचा दी गई हैं। कोई समय अपने आप में अकेला नहीं होता,बल्कि उसमें स्पेस और संस्कृति भी होती है।
बतौर अध्यक्ष मलयाली कवि ए अरविंदाक्षन ने कहा, कविता और जीवन दो अलग-अलग चीजें नहीं हैं बल्कि एक दूसरे से जुड़ी हैं। रघुवंश मणि ने कहा, कविता में हो रहे विरोध को देखना आवश्यक होगा, वहीं नलिन रंजन सिंह ने कहा, कविता में समय और लोक की चिंताएं शामिल हैं। इसी क्रम में प्रोफेसर एए फातमी, चंद्रकांत पाटिल आदि ने भी विचार व्यक्त किए। समारोह में राजेेश जोशी, विभूति मिश्र, ज्ञानेंद्रपति, विनोद शुक्ल, अनामिका, डॉ.शांति चौधरी, मीनूरानी दुबे आदि मौजूद थीं। समन्वयक, संयोजक अनिल मिश्र ने स्वागत और जितेंद्र श्रीवास्तव ने संचालन किया।
इलाहाबाद संग्रहालय सभागार में देश भर से जुटे नामचीन कवियों ने कवि केदारनाथ अग्रवाल के बांदा स्थित पैतृक आवास को संरक्षित करने के साथ ही उसे राष्ट्रीय स्मारक बनाए जाने की मांग की। पारित प्रस्ताव में कहा गया कि कवि केदारनाथ अग्रवाल के पैतृक आवास को बेचने की खबरें मीडिया से आ रही हैं। हालांकि इस प्रस्ताव का विरोध भी हुआ। हाल में बैठे एक वरिष्ठ नागरिक ने स्वयं को कवि केदारनाथ अग्रवाल का भाई बताया। कहा, केदार जी के पैतृक आवास में उनकी बहू और नाती रह रहे हैं। उनके इस कथन का विरोध करते हुए सभी ने एकजुटता के साथ पैतृक आवास को बेचे जाने का करार है, जो जल्द ही सबके सामने आ जाएगा। पैतृक आवास को संरक्षित करने का प्रस्ताव एकमत से पास कर दिया।