करवाचौथ का पर्व रविवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुहागिनों ने सोलह शृंगार कर दिनभर निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी आयु की कामना की। विधिवत पूजन कर चांद को अर्घ्य दिया और पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोला।
पर्व को लेकर महिलाएं सुबह से ही उत्साहित नजर आ रही थीं। शाम ढलने से पहले ही घर के आंगन में पूजा की तैयारियां की गईं। गाय के गोबर से लीपने के बाद चावल के आटे से चौक या रंगोली बनाई गई। उस पर करवा और पूजा की थाली रखी गई। फल, फूल, रोली, सिंदूर, मिठाई और गंगाजल रखा गया।
घर के आंगन में शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय आदि की पूजा की गई। इस बीच किसी ने चांद निकलने की सूचना दी तो महिलाओं के चेहरे खिल उठे। उन्होंने पहले चलनी से चांद और फिर पति के दर्शन किए। जिनके पति घर से दूर थे, उन्होंने वीडियो कॉल के जरिये अपने ‘चांद’ को निहारा। अपार्टमेंट्स में महिलाओं ने एकजुट होकर करवाचौथ का व्रत मनाया। रविवार को भी सिविल लाइंस में राजस्थानी मेहंदी लगाने वाले के लिए होड़ सी रही।