करछना स्थित पचदेवरा में हुए रेल हादसे ने रेलवे के सुरक्षा तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिया है। पांच लोगों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस सामूहिक लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है।
करछना स्थित पचदेवरा में हुए रेल हादसे ने रेलवे के सुरक्षा तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिया है। पांच लोगों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस सामूहिक लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है। हालांकि इस मामले में रेलवे के जेएजी अफसरों ने जांच तो शुरू कर दी है। लेकिन, जिनके घरों के चिराग बुझे हैं उसकी भरपाई अब शायद ही हो सके।
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इस त्रासदी ने आरपीएफ, जीआरपी और ट्रेन के कॉमर्शियल स्टाॅफ की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। जब ट्रेन 45 मिनट तक संवेदनशील इलाके में खड़ी थी, तब ड्यूटी पर तैनात जवानों ने यात्रियों को ट्रैक पर जाने से रोका नहीं। साथ ही कोच में तैनात वाणिज्य विभाग के स्टाॅफ और अन्य कर्मचारियों ने यात्रियों को कोच के भीतर रहने की हिदायत भी नहीं दी।
फिलहाल रेलवे प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीनियर डीसीएम, सीनियर डीएससी, सीनियर डीओएम, सीनियर डीईई समेत पांच उच्चाधिकारियों की जांच समिति गठित की है। अधिकारियों का दावा है कि रिपोर्ट में लापरवाही पुष्ट होने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।