उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से हुए हादसे में हुई तबाही और त्रासदी का प्रभाव संगम की रेती पर बसी तबुओं की नगरी तक पहुंचा है। पु्ण्य की आस में शिविरों में रह रहे कल्पवासियों के अतिरिक्त तीर्थपुरोहित और संत-महात्मा भी भयभीत हैं। उन्हें आशंका है कि सैलाब संगम की रेती तक पहुंचा तो तबुंओं की नगरी भी तबाह हो जाएगी।
हरी मछली निशान वाले तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल ने कहा, समाचारों को सुनकर कल्पवासियों में भय जरूर रहा लेकिन साथ आए संत कबीर नगर के राम मिलन यादव, जिगना के विनोद पाठक, सहजनवा के भूषण उपाध्याय आदि ने ही समझाया, गंगा माई सब ठीक करेंगी। वैसे कल्पवासियों का हालचाल पूछने के लिए परिजनों के फोन जरूर आए लेकिन उन्होंने ही भरोसा दिलाया कि प्रयागराज तक उसका खतरा कम है, उम्मीद है सब ठीक हो जाएगा। बुजुर्ग राधेश्याम तिवारी और अर्जुन महाराज तो बोले, गंगा माई का कुछ जल आया तो अमवसा से पहले यहां संगम और निर्मल हो जाएगा।
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काली सड़क पर शिविर लगाए तीर्थपुरोहित गोपाल मिश्र ने कहा, कल्पवासियों ने सूचना के बाद अपने शिविरों में हनुमान चालीसा का पाठ करके सर्वमंगल की कामना की। अक्षयवट मार्ग स्थित तबेलिया निशान वाले राजेश तिवारी बोले, खबर सुनकर कल्पवासियों के मन में हलचल हुई। लोग अपने शिविर से निकलकर एक दूसरे से चर्चा करते रहे लेकिन उम्मीद भी जताई कि सप्ताह भर में गंगा माई सब ठीक कर देंगी।
काली सड़क गंगा केकिनारे शिविर लगाए तीर्थपुरोहित सरजू प्रसाद तिवारी ने जोड़ा, भइया कल्पवासियों में गंगा माई के प्रति अटूट आस्था है। कई महिलाएं शिविर से निकलकर तख्त तक आई थीं लेकिन समझाने पर लौटीं कि हां, गंगा माई ने जब कोरोना से बचा लिया तो कल्पवास भी पूरा कराएंगी।
शोकसभाओं में कहा, त्रासदी दुर्भाग्यपूर्ण
माघ मेले स्थित सूरि सेवाश्रम में हुई सभा में त्रासदी पर दुख व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया। बैठक में शामिल रामजी मिश्र, श्याम सुंदर पांडेय. शैलेंद्र अवस्थी, प्रेमशंकर पांडेय, श्याम सुंदर पांडेय आदि ने त्रासदी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। टैगोर टाउन निवासी परिषद के अध्यक्ष डॉ शैलेन्द्र अवस्थी, मां अलोप शंकरी सोसाइटी के संयोजक अरविंद पांडेय ने आपदा में आहत नागरिकों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए प्रार्थना की कि ईश्वर उनके परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करे।