ओबीसी सूची में चौथे नंबर की जाति है कहार
याची का दावा है कि कहार के पेशे से जुड़े परंपरागत काम करने वाले लोगों में ज्यादातर 11 जनजातीय यानी ट्राइब्स के लोग होते हैं। इनमें मुख्य रूप से भोई, धीमर, धुरिया, गुरिया, गोंड, कलेनी, कमलेथर, हुर्का, मछेरा, महारा, पनभरा और सिंघाड़िया शामिल हैं। इन जातियों को कहीं एससी की कैटेगरी में रखा गया है तो कहीं एसटी की कैटेगरी में उत्तर प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ही ओबीसी लिस्ट में कहार समुदाय को चौथे नंबर पर रखा गया है। इस वजह से रेवेन्यू डिपार्टमेंट के लोग इन्हें ओबीसी कैटेगरी का ही कास्ट सर्टिफिकेट देते हैं। जबकि, इन्हें एससी या एसटी का जाति प्रमाण पत्र मिलना चाहिए। अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी।