पीड़िता के पिता के प्रभाव केचलते नहीं मिल रहा न्याय
उन्होंने यह तर्क दिया गया कि आवेदकों को मुकदमा लड़ने के लिए अपनी पसंद के वकील को नियुक्त करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन पीड़ित के पिता के प्रभाव के कारण आवेदकों को उस अवसर से वंचित किया जा रहा है। वहीं, विपक्ष वकील ने स्थानांतरण आवेदनों का विरोध करते हुए जिला न्यायालय झांसी में विभिन्न एडवोकेटों द्वारा आवेदक विपिन तिवारी और शैलेन्द्र नाथ पाठक की ओर से दायर वकालतनामे की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया।
आवेदक रोहित कुमार की ओर से कोई वकालतनामा दायर नहीं किया गया था। एजीए ने प्रस्तुत किया कि चूंकि मामले में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। जबकि मामला जघन्य है और सामूहिक बलात्कार से संबंधित है। इसलिए इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यदि मामला झांसी से दूसरे जिलों में स्थानांतरित किया जाता है, तो सामूहिक बलात्कार पीड़िता को दूसरे जिले की यात्रा करनी होगी। जिसके चलते अंतत: पीड़िता को कठिनाई और मानसिक पीड़ा हो सकती है। कोर्ट ने कहा इतना ही नहीं औपचारिक गवाहों को छोड़कर अन्य सभी गवाह जो झांसी के निवासी हैं, उन्हें दूसरे जिले की यात्रा करनी होगी। जहां मामले को स्थानांतरित किया जाएगा। कोर्ट जिला मजिस्ट्रेट झांसी को मामले की प्रगति की निगरानी करने का निर्देश दिया।