सूचना तकनीक के इस्तेमाल से आने वाले समय में अदालतों की मौजूदा कार्यप्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन आने वाला है। अब न तो फाइलों का अंबार होगा और न ही मुकदमों में तारीख पाने के लिए अदालत के चक्कर काटने होंगे। मुकदमों की सूचनाएं घर बैठे मोबाइल फोन पर ही उपलब्ध होंगी। यहां तक कि आने वाले समय में अदालत के नोटिस और समन भी मोबाइल पर भेजे जाएंगे। शनिवार को हाईकोर्ट की पहली ई-कोर्ट का उद्घाटन करते हुए सुप्रीमकोर्ट की ई-कमेटी के चेयरमैन जस्टिस मदन बी लोकुर ने इसी ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा कि अब से कुछ साल पहले हम टेलीफोन पर नंबर डायल करते थे। किसी ने स्मार्ट फोन के बारे में सोचा भी नहीं था। आज मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए मुकदमों की सूचना एसएमएस और ई-मेल से घर बैठे मिल रही है। हमने जो मोबाइल एप लांच किया है उसके 70 हजार डाउन लोड अब तक हो चुके हैं। वादकारी अब सवाल पूछ रहे हैं। हर वादकारी को यह एप्लीकेशन अपने मोबाइल पर डाउनलोड करनी चाहिए। रजिस्ट्री को बोझ हल्का हुआ है। उन्होंने केस मैनेजमेंट को और बेहतर करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सूचना तकनीक के प्रयोग से हमने त्वरित न्याय देने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।