यह है पूरा मामला
मामला यह था कि सत्येन्द्र पाल की हत्या के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतक के बेटे को गिरफ्तार कर लिया और जब वे उसे रिमांड पर लेने के बाद पुलिस वैन में ले जा रहे थे, तो आवेदक वकील होने के नाते पुलिस के साथ गए और दूरी बनाकर वे सर्च ऑपरेशन की रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी कर रहे थे।
उनका मामला यह था कि जब पुलिस अधिकारियों को उस स्थान पर पहुंचने पर जहां कथित वसूली की गई थी, पता चला कि पूरी घटना वीडियो कैमरे में रिकॉर्ड की जा रही है, तो उन्होंने वीडियोग्राफी बंद कर दी। फिर आवेदक का वीडियो कैमरा छीन लिया और पुलिस टीम ने याची और उसके साथ आए अन्य व्यक्तियों को जबरन बंधक बनाकर गाड़ी में डाल लिया और कुछ दूरी पर ले जाकर नहर में फेंकने का प्रयास किया।