क्या था अधिवक्ता तर्क
हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करने वाले अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 20 मई को अधिवक्ता जागृति शुक्ला इंदिरा गांधी चौराहे के पास सड़क हादसे में घायल हो गईं। साथी महिला अधिवक्ता और अन्य लोग उन्हें लेकर एसआरएन अस्पताल पहुुंचे। यहां पर इमरजेंसी में तैनात जूनियर डॉक्टर सोते मिला। जगाने पर उन लोगों ने घायल जागृति शुक्ला के साथ आए लोगों के साथ मारपीट की और उन्हें अपमानित किया।
जागृति शुक्ला के उपचार में चार घंटे की देरी की गई। जिससे कारण उनकी स्थिति काफी नाजुक हो गई। उन्हें दूसरे अस्पताल में ले जाया गया लेकिन हालत में सुधार न होने पर उन्हें पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया, जहां उपचार के दौरान आठ जून को उनकी मौत हो गई। यह भी आरोप है कि इस मामले में चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ठीक से विवेचना नहीं कर रही थी। जिसके कारण पीआईएल दाखिल करनी पड़ी।