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Prayagraj : अधिवक्ता जागृति शुक्ला मौत मामले की होगी न्यायिक जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Wed, 10 Jun 2026 01:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत के मामले की न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया है। 20 मई को जागृति शुक्ला सड़क हादसे में घायल हो गई थीं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता जागृति शुक्ला। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत के मामले की न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया है। 20 मई को जागृति शुक्ला सड़क हादसे में घायल हो गई थीं। उन्हें उपचार के लिए एसआरएन अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों  ने इलाज में लेट लतीफी और मनमानी की। इसके कारण अधिवक्ता की हालत और खराब हो गई।

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उन्हें पीजीआई लखनऊ में भर्ती कराया गया था, लेकिन बचाया नहीं जा सका। घटना बाद काफी बवाल बढ़ गया। अधिवक्ताओं ने इसका विरोध किया और चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने न्यायिक जांच का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अधिवक्ता ओमर जामिन की ओर से दाखिल पीआईएल पर जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस स्वरूप कुमार चतुर्वेदी की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया।

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क्या था अधिवक्ता तर्क

हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करने वाले अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 20 मई को अधिवक्ता जागृति शुक्ला इंदिरा गांधी चौराहे के पास सड़क हादसे में घायल हो गईं। साथी महिला अधिवक्ता और अन्य लोग उन्हें लेकर एसआरएन अस्पताल पहुुंचे। यहां पर इमरजेंसी में तैनात जूनियर डॉक्टर सोते मिला। जगाने पर उन लोगों ने घायल जागृति शुक्ला के साथ आए लोगों के साथ मारपीट की और उन्हें अपमानित किया। 

जागृति शुक्ला के उपचार में चार घंटे की देरी की गई। जिससे कारण उनकी स्थिति काफी नाजुक हो गई। उन्हें दूसरे अस्पताल में ले जाया गया लेकिन हालत में सुधार न होने पर उन्हें पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया, जहां उपचार के दौरान आठ जून को उनकी मौत हो गई। यह भी आरोप है कि इस मामले में चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस  ठीक  से विवेचना नहीं कर रही थी। जिसके कारण पीआईएल दाखिल करनी पड़ी। 
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