प्रकरण से जुड़े सभी अफसरों से एक-एक कर आयोग के सदस्यों ने बात की और जानकारी ली। सुबह नौ बजे शुरू हुई बैठक दोपहर दो बजे तक चली। इससे पहले अतीक-अशरफ को पुलिस अभिरक्षा में लेने वाले उमेश पाल हत्याकांड के विवेचक इंस्पेक्टर राजेश कुमार मौर्य को भी बुलाया गया। अफसराें की मौजूदगी में आयोग के अन्य सदस्यों सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी, सेवानिवृत्त जिला जज बृजेश कुमार सोनी व सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक सुवेश कुमार सिंह ने इंस्पेक्टर से घटना के बाबत एक-एक कर सवाल पूछे और उनके बयान दर्ज किए। बैठक खत्म होने के बाद आयोग के सदस्य वापस चले गए।
एसआईटी अफसर भी रहे मौजूद
बैठक में आला अफसरों संग अतीक-अशरफ हत्याकांड की विवेचना कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) में शामिल अफसर भी मौजूद रहे। इनमें एसआईटी अध्यक्ष एडीसीपी अपराध सतीश चंद्र के अलावा सदस्य एसीपी सत्येंद्र प्रसाद तिवारी व इंस्पेक्टर ओमप्रकाश शामिल रहे।
अस्थाई कार्यालय खोल सकता है आयोग
सूत्रों का कहना है कि न्यायिक आयोग के सदस्य फिलहाल भले ही वापस चले गए हों, लेकिन जांच के क्रम में जल्द ही वह फिर आ सकते हैं। यही नहीं, इस बात की भी संभावना है कि आयोग के सदस्य फिर कुछ दिनाें तक यहां कैंप करें। इस दौरान अस्थाई कार्यालय बनाकर जांच की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकता है।
दो महीने में देनी है रिपोर्ट, 21 दिन बीते
न्यायिक आयोग को दो महीने में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। आयोग का गठन अतीक-अशरफ हत्याकांड के अगले दिन यानी 16 अप्रैल को किया गया था। इस तरह 21 दिन बीत चुके हैं, जिस दौरान दो बार आयोग के सदस्य घटनास्थल का दौरा कर चुके हैं। टेक्निकल टीम की ओर से क्राइम सीन की मैपिंग भी हो चुकी है।