Judge sent to jail to college degree reader denied relief
प्रयागराज। बिना सम्मन जारी किए सीधे गैर जमानती वारंट जारी कर डिग्री कालेज के रीडर को जेल भेजने वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट को हाईकोर्ट ने राहत देने से इंकार कर दिया है। साथ ही मजिस्ट्रेट को दी गई सेंसर इंट्री (निंदा प्रविष्टि) के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज कर दी है। याचिका में हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीशों की समिति के निर्णय को चुनौती दी गई थी। मजिस्ट्रेट के खिलाफ विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीशों की समिति ने निंदा प्रविष्टि की सजा दी है। कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इंकार कर दिया है कि कार्यवाही प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी न्यायिक मजिस्ट्रेट लल्लू सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची जब फैजाबाद जिला अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे तो उन्होंने साकेत परास्नातक महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष व रीडर डा. राधिका प्रसाद त्रिपाठी के खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले में गैर जमानती वारंट जारी कर उनको जेल भेज दिया था। इससे पहले उन्होंने कोई सम्मन भी जारी नहीं किया था। शिकायत पर विभागीय जांच में याची को लापरवाही बरतने का दोषी करार दिया गया। इस रिपोर्ट पर हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने सेंसर इंट्री की सजा सुनाई थी, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।