नौकरी के साथ प्रशिक्षण तथा रोजगारपरक कोर्सेज की पढ़ाई करके कॅरियर को नई ऊंचाई दी जा सकती है। इस मकसद से दूरस्थ शिक्षा को रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इतना ही नहीं परंपरागत विश्वविद्यालयों में भी दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है। इस मकसद से मुक्त विश्वविद्यालयों में हर तरह के कोर्सेज शुरू किए गए हैं तो यहां इलाहाबाद विश्वविद्यासलय में भी दूरस्थ शिक्षा को विकसित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञ शिक्षकों की टीम बनाई गई है। खास यह कि स्नातक, परास्नातक की पढ़ाई के साथ विद्यार्थी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स में भी दाखिला ले सकते हैं।
स्किल इंडिया अभियान में दूरस्थ शिक्षा के संस्थानों की भागीदारी बढ़ने जा रही है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में स्नातक और परास्नातक स्तर पर तीन नए पाठ्यक्रमों की अनुमति दी गई है। इग्नू में आगामी सत्र से फैशन डिजाइन और बिजनेस एंटरप्रिन्योरशिप में बीएससी की पढ़ाई होगी। इसके लिए यूजीसी से अनुमति मिल गई है। इसके अलावा बिजनेस एंटरप्रिन्योरशिप में एमएससी कोर्स की भी अनुमति दी गई है।
राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में शिक्षण प्रशासन, कॅरियर काउंसिलिंग, गांधी विचार एवं शांति अध्ययन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रबंधन एवं फिल्म प्रोडक्शन, पत्रकारिता, उपभोक्ता सरंक्षण, ग्रीन सोशलवर्क, अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग एंड ई-बिजनेस, वित्तीय प्रबंधन, विपणन प्रबंधन, मानव संसाधन विकास, टूरिज्म मैनेजमेंट, ग्रामीण विकास आदि विषयों में स्नातकोत्तर डिप्लोमा कोर्सेज शुरू किए गए हैं। कौशल विकास पर आधारित मछलीपालन, मुर्गीपालन, पर्ल कल्चर, कारपेट प्रोडक्शन, योगा इन माडर्न लाइफ, फूड टेक्नोलॉजी एंड हॉस्पिटेलिटी, फूड प्रोसेसिंग एंड प्रिजर्वेशन, ग्लास वेयर, ब्रास वेयर, ई-कॉमर्स, डिजिटल फोटोग्राफी, ज्वेलरी, डिजाइनिंग एंड इंटीरियर डिजाइनिंग आदि विषयों में भी कोर्सेज शुरू किए गए हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में कई सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्सेज चलाए जाते हैं, जिनमें स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई के साथ दाखिला लिए जा सकते हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा के आधार को मजबूत किया जा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर इसके लिए गाइडलाइन तैयार की गई है। इस बाबत विश्वविद्यालयों को पत्र भी भेजा गया है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा के अंतर्गत अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगारपरक कोर्सेज शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए विश्वविद्यालय में अलग-अलग टीम बनाई गई है।