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माताओं ने बेटे के मंगल को रखा जिउतिया व्रत

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Jivtiya Vrat - फोटो : CITY DESK
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आंगन में रंगोली बनाकर पूजी गईं लक्ष्मी, सूर्य
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प्रयागराज। आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर रविवार को माताओं ने अपनेे बेटे के आयुष्य एवं मंगलकामना के लिए जीवत्पुत्रिका-जिउतिया का व्रत रखा। मान्यता है कि इस व्रत को रखने वाली स्त्री को कभी पुत्र शोक का दुख नहीं झेलना पड़ता है। ऐसी माताओं ने भी यह व्रत रखा, जिनके संतान तो होती है लेकिन किन्हीं कारणों से जीवित नहीं रह पाती।
शुरुआत सूर्य पूजन से करने के बाद माताओं ने दिन भर का व्रत रखा। संगम सहित गंगा यमुना के किनारे व्रती महिलाओं ने डुबकी लगाई। फिर गोधूलि वेला या प्रदोष काल में उन्होंने घर के आंगन में रंगोली बनाई। परंपरानुसार किसी ने देवी लक्ष्मी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित की तो किसी ने तस्वीर रखकर पूजा की।
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भगवान विष्णु, महालक्ष्मी, शिव-पार्वती का पूजन करके माताओं ने बेटे के आयुष्य और मंगल के लिए प्रार्थना की। पूजा पूरी होने पर प्रसाद ग्रहण करके पारण किया गया। लेकिन, किसी भी व्रती महिला ने कटा हुआ फल नहीं लिया। हालांकि अधिकतर महिलाएं सोमवार को सूर्योदय के बाद पारण करेंगी।
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