कान्हा के जन्मोत्सव पर घर-घर उमड़े उल्लास का क्रम शनिवार को दोगुना हुआ। इस्कॉन सहित राधाकृष्ण के विभिन्न मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा, उत्साह, उमंग के साथ धूमधाम से मनाई गई। घंटा-घड़ियाल और शंखध्वनि के बीच कान्हा के जन्म की लीला हुई तो नंद बाबा की तरह ही हर कोई हर्षित हुआ। आनंद में सभी मगन होकर नाचते-गाते, हरिनाम संकीर्तन करते रहे। आधी रात के पहले आरंभ उत्सव आधी रात के बाद तक जारी रहा।
काशीराज नगर, बलुआघाट स्थित अंतरराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ ‘इस्कॉन’ में कान्हा का जन्मोत्सव अनूठे तरीके से मनाया गया। मंदिर परिसर सुगन्धित रंग-बिरंगे फूलों से महकता एवं बिजली की झालरों से जगमगाता रहा। मंदिर पहुंचने वाले दोनों की रास्तों पर श्रद्धालुओं के आने का क्रम बना रहा। जरी, मोतियों से जड़े तकरीबन डेढ़ लाख रुपये वाली पोशाक में कान्हा आकर्षक रूप में सजे तो कोलकाता, बंगुलुरू, मुंबई से मंगाए गए फूलों से कान्हा के दरबार का मोहक शृंगार किया गया। दिल्ली से आए सांस्कृतिक कला केकलाकारों की गीत, भजन की प्रस्तुतियां आनंदित करती रहीं। शृंगार आरती के साथ उक्रेन के कान्हा भक्तों की विशेष टोली ने ‘हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा-कृष्णा हरे हरे’ की मंगलधुन पर नृत्य किया तो बाकी भक्तगण भी नाचने, गाते, झूमते रहे।
अद्वैत आचार्य दास की देखरेख में चांदी के 108 कलशों से श्रीश्री राधावेणी माधव के महाभिषेक के बाद कान्हा जन्म की लीला हुई। फिर युगल नाम की महाआरती उतारी गई। पूरा परिसर कान्हा के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों की ओर से कान्हा को 108 से अधिक व्यंजनों के अतिरिक्त पहली बार 5001 कामधेनु रसगुल्लों का भोग लगाया गया। युगल प्रतिमा को तीन बार भोग लगाया गया तो तीन बार ही शृंगार किया गया। श्रद्धालु बारी-बारी से झांकियों के साथ ही युगल प्रतिमा के भी दर्शन करते रहे। कार्यक्रम में वेणुविजय दास, मुनिराज, बेलाराज, श्यामजी अग्रवाल, बसंत लाल आजाद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे।
इस्कॉन के तीन दिनी उत्सव के दूसरे दिन रविवार, 25 अगस्त को दोपहर 11:30 बजे इस्कॉन के संस्थापकाचार्य एसी भक्ति वेदान्त स्वामी श्रील प्रभुपाद जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मीडिया प्रभारी दीनदयाल कृष्ण दास के मुताबिक प्रभुपाद स्वर्णकमल के आसन पर विराजमान होंगे।
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श्री ब्रज रस रसिक भजन मंडल की ओर से श्यामा सदन, राधे कृष्णा एंक्लेव, लूकरगंज में छह दिनी उत्सव आरंभ हुआ। संकीर्तन के बाद अभिषेक से कान्हा का जन्मोत्सव मनाया गया। लाल बिहारी गर्ल्स इंटर कॉलेज के निकट श्री कृ्ष्णा भवन में भी जन्मोत्सव की धूम रही। कुंजबिहारी लाल अग्रवाल ट्रस्ट की ओर से रामबाग स्थित कुंज बिहारी धर्मशाला में भी बहुरंगी प्रस्तुतियां आनंदित करती रहीं। सूबेदारगंज के भुवनेश्वर नाथ मंदिर में भजन-कीर्तन के बीच कान्हा जन्म की लीला हुई।
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पथरचट्टी रामलीला कमेटी के छह दिनी उत्सव के दूसरे दिन कलाकार आश्रया द्विवेदी मधु ने निबिया की डरिया मैया नावेली झुलनवा हो कि झूमि झूमि ना से शुरुआत करके समा बांधने के बाद ‘हमके भावे नाहीं घर के परानी पिया ए बड़ी परेसानी पिया ना’, मिर्जापुर कइला गुलजार हो, कचौड़ी गली सून कइला बलमू जैसी कजरी से श्रोताओं से नाता जोड़ा। संयोजक धर्मेन्द्रकुमार भइया ने कलाकारों का स्वागत जबकि कार्यकारी अध्यक्ष मुकेश पाठक तथा महामंत्री आनंद सिंह ने सम्मान किया । कमेटी के प्रवक्ता लल्लूलाल गुप्त के मुताबिक 25 अगस्त को डॉ. पीएल राकेश प्रधान का ग्रुप नौटंकी प्रस्तुत करेगा।
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किन्नर अखाडा प्रयागराज की ओर से भी श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई गई। पीठाधीश्वर टीना मां ने शिष्यों सहित बैरहना स्थित आवास पर पूजन-अर्चन के बाद शिष्यों में प्रसाद बांटा। कहा, भगवान श्रीकृष्ण ने हमें गीता का संदेश दिया। किन्नर अखाडे की मोना मां ने भी शिष्यों सहित रसूलाबाद में धूमधाम से श्रीकृष्णजन्माष्टमी मनाई।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में शहर के विभिन्न राधाकृष्ण मंदिरों में अद्भुत उल्लाल उमड़ा। महाजनी टोला स्थित निंबार्काचार्य पीठ में पीठाधिपति आचार्य विष्णुकांत गोस्वामी की देखरेख में कान्हा जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। युगल नाम कीर्तन के साथ 151 दीपों से आरती उतारी गई। श्री निम्बार्क आश्रम में कृष्ण स्वरूप श्रीवास्तव एवं सहयोगियों की ओर से आरंभ अखंड युगल नाम संकीर्तन की समाप्ति पर भजन संध्या हुई। इसमें कलाकारों रत्नेश दुबे, अंकिता चतुर्वेदी, अमित आदि ने भजनों से कान्हा की महिमा बखानी।