‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चुनौती और प्रतिरोध केआयाम’ पर व्याख्यान
दूधनाथ सिंह को लिखे पत्रों का संग्रह ‘प्रिय दूधनाथ’ का लोकार्पण
प्रयागराज। जनवादी लेखक संघ की ओर से कथाकार दूधनाथ सिंह के 83वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में रविवार को आयोजित स्मृतिपर्व पर जुटे शिक्षकों, रचनाकारों, शिष्यों ने उनका भावपूर्ण स्मरण किया। साहित्य और शख्सियत से जुड़ेतमाम पहलुओं को रेखांकित किया गया तो दूधनाथ सिंह स्मृति व्याख्यानमाला के तहत ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चुनौती और प्रतिरोध केआयाम’ पर भी चर्चा हुई।
साहित्यकार वीरेंद्र यादव ने कहा, देशज परंपराओं से जुड़ कर ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रतिरोध संभव है। धार्मिक ग्रंथों का काउंटर ‘नैरेटिव’ करने के लिए रामचरित मानस जैसे धार्मिक ग्रंथों का उत्तरपाठ जरूरी है। दूधनाथ जी कहते थे, ब्राह्मणवाद ही इस देश की प्रगति में बाधक है, यह एक उपनिवेशवाद है। आज सावरकर को ‘भारतरत्न’ देने के साथ ही गांधी के समन्वयवादी हिंदुत्व से इतर एक अन्य हिंदुत्व लाया जा रहा है जो एक वर्चस्ववादी राष्ट्रवाद को स्थापित कर सके।
बतौर अध्यक्ष प्रो.राजेंद्र कुमार ने कहा कि आज बुद्धिजीवियों पर जितने खतरे मंडरा रहे हैं, हमारी जनता उतनी ही सम्मोहित है। आज जनता को पता ही नहीं कि उसे किस अंधेरे में ढकेला जा रहा है। मौजूदा समय में बहुमतवाद के खतरे हैं लेकिन हमें अपनी बात सौ तरीके से कहने की जरूरत है। दूधनाथ जी ने समय के साथ अपने आप को बदला, आज हमें भी नए तरीके से सोचना होगा। कवि हरीशचंद्र पाण्डे ने कहा, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जड़ें बहुत गहरी हैं, हमें उनकी जड़ों पर चोट करना होगा। नलिन रंजन सिंह ने कहा, यह तो कहा जा रहा है कि हमने दुनिया को बुद्ध दिया लेकिन यह नहीं बताया जा रहा है कि हमने बुद्ध की परंपरा का पालन कितना किया।
विवेक निराला बोले, विभिन्न सांस्कृतिक चेतना वाले राष्ट्र में एक विचार, एक धर्म और एक धारणा को थोपने की असंगत राजनीति और आकांक्षा है। दूधनाथ जी कहते थे, किताबें शक पैदा करती हैं, आपकी समझ के जाले को साफ करती हैं।आज सत्ता को सबसे ज्यादा दिक्कत किताबों और बुद्धिजीवियों से ही है। इस दौरान विभु प्रकाश सिंह के संपादन में साहित्य भंडार से प्रकाशित दूधनाथ सिंह को लिखे पत्रों का संग्रह ‘प्रिय दूधनाथ’ का लोकार्पण किया गया।
सेंट जोसेफ कॉलेज के होगन हाल में हुए कार्यक्रम में स्वागत मनोज सिंह, संचालन बसंत त्रिपाठी और धन्यवाद ज्ञापन सुधीर सिंह ने किया। कार्यक्रम में दूधनाथ जी के बेटे अनिमेष, बेटी अनुपमा, दामाद अजय सिंह के अतिरिक्त केके पांडे, सूर्यनारायण, धनंजय चोपड़ा, सीमा आजाद, प्रवीण शेखर, संतोष भदौरिया, संध्या नवोदिता, सुबोध, अजित प्रियदर्शी, विभु सिंह, विंध्याचल यादव आदि मौजूद थे।
Jales, Doodhnath Singh- फोटो : CITY DESK