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सेक्युलर सरकार में धार्मिक संस्थाओं को भूमि आवंटन कैसे

Wed, 21 Jun 2017 01:42 AM IST
अमर उजला ब्यूरो इलाहाबाद
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इलाहाबाद
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सरकारी जमीन धार्मिक संस्थाओं को पट्टे पर दिए जाने की नीति पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार से पूछा है कि जब संविधान में राज्य का स्वरूप सेक्युलर है तो फिर धार्मिक संस्थाओं को सरकारी जमीन किस नियम से पट्टे पर दी जा सकती है। क्या सरकार एक और जवाहर बाग बनाना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है। जनता की जमीन प्राइवेट ट्रस्ट को देने पर विचार होना चाहिए कि क्या पंथनिरपेक्ष सरकार किसी धार्मिक संस्था को जमीन दे सकती है या नहीं। कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर सरकार का पक्ष रखने के लिए कहा है। मामले की सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
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ट्रस्ट को दी गई जमीन पर किसी भी प्रकार के निर्माण या भूमि के स्वरूप परिवर्तन पर रोक लगाते हुए अदालत ने डीएम मथुरा को निर्देश दिया है कि वह इसका सख्ती से पालन कराएं। भूमि आवंटन से संबंधित सभी पत्रावलियां अगली सुनवाई पर अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मथुरा के लीलाधर की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति अशोक कुमार की पीठ ने ट्रस्ट के सदस्य शैलेंद्र सिंह चौहान द्वारा दाखिल याचिका वापस लिए जाने पर भी नाराजगी जताई। शैलेंद्र सिंह ने विवादित भूमि पर बिना नक्शा पास कराए सत्संग भवन के निर्माण को चुनौती दी थी। इस पर हाईकोर्ट ने चार अक्तूबर 2016 को निर्माण रोकते हुए शासन को इस मामले में निर्णय लेने का आदेश दिया था।

मामला सुप्रीमकोर्ट तक गया मगर से वापस यह कहते हुए लौटा दिया गया कि हाईकोर्ट इस प्रकरण को तीन माह में तय करे। पीठ ने कहा कि प्रकरण तय होने से पूर्व जानबूझकर याचिका वापस ले ली गई। कोर्ट ने कहा, इस खेल में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की भूमिका भी संदिग्ध है। अवैध निर्माण को कपांउडिंग शुल्क जमा कराकर स्वीकृति प्रदान कर दी गई। पुनरीक्षण में प्राधिकरण नए सिरे से निर्णय लेने के लिए कहा।
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ट्रस्ट के बाबा पंकज यादव ने इस आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस पर पांच जुलाई को सुनवाई होनी है। लीलाधर की जनहित याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट को 4.490 हेक्टेयर भूमि 8148 रुपये में सरकारी जमीन 30 साल के पट्टे पर दे दी गई है। इसे रद्द किया जाए और अवैध निर्माण रोका जाए।

याचिका संबद्ध करने की बात नहीं मानी
इलाहाबाद। पीठ ने प्रदेश सरकार के वकीलों की इस मांग को स्वीकार नहीं किया कि इस याचिका और प्रकरण में दाखिल अन्य याचिकाओं के साथ संबद्ध कर सुनवाई की जाए। कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट को तीन माह में मामला तय करने का निर्देश दिया है। इसलिए वह इस पर अलग से सुनवाई करेंगे।
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