इलाहाबाद। शिक्षकों की कमी तथा क्रेडिट बेस्ड च्वॉयस सिस्टम (सीबीसीएस) की वजह से परास्नातक में पढाई करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं को झटका लगा है। जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज में इस साल परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश ही नहीं लिया जाएगा। शिक्षकों की भर्ती के बाद अगले सत्र से परास्नातक कोर्स शुरू होंगे। विश्वविद्यालय के कई विभागाध्यक्षों ने भी सीट कम करने के लिए पत्र लिखा था। हालांकि उन्हें अनुमति नहीं मिली और सभी सीट पर प्रवेश लिए जा रहे हैं।
इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों में इसी सत्र से परास्नातक पाठ्यक्रमों के लिए अनुमति दी गई है।
जगत तारन में संस्कृत, अर्थशास्त्र, हिन्दी, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, प्राचीन इतिहास, शिक्षाशास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में एमए कोर्स की स्वीकृति मिली है। संशाधन की कमी की वजह से कॉलेज प्रशासन ने सिर्फ दो विषयों संस्कृत और अर्थशास्त्र में पीजी शुरू करने का निर्णय लिया। इसके लिए नोटिफिकेशन भी हो गया था लेकिन गवर्निंग बॉडी ने इन दो विषयों में भी पीजी शुरू करने से मना कर दिया। प्राचार्य डॉ.कमला दुबे का कहना है कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। इसके अलावा दाखिले की प्रक्रिया भी देर से शुरू हो पाई। इसलिए गवर्निंग बॉडी ने इस साल के बजाय अगले सत्र से पीजी कोर्स शुरू करने के लिए कहा है।
इसी तरह से सीबीसीएस तथा उसके मानक का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष ने भी सीट कम करने का प्रस्ताव रखा था। अर्थशास्त्र विभाग में भी इस बाबत पहल की गई थी। हालांकि कुलपति ने इसकी अनुमति नहीं दी।
स्नातक में 60 फीसदी अंक की बाध्यता पर विवाद
दूसरे विषयों में पीजी के लिए मेरिट के अलावा अन्य शर्तें लगाने का विरोध
इलाहाबाद। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्नातक से इतर दूसरे विषयाें में प्रवेश को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। एम-एमएससी मनोविज्ञान में प्रवेश के इच्छुक अदर सब्जेक्ट के विद्यार्थियाें के लिए स्नातक में न्यूनतम 60 फीसदी अंक बाध्यता रखी गई है। इसके विरोध में छात्रों ने आंदोलन की घोषणा की है। आइसा से जुड़े छात्र-छात्राओं ने डबल एमए के लिए भी न्यूनतम 60 प्रतिशत की बाध्यता खत्म करने की मांग की है।
यदि कोई विद्यार्थी स्नातक से ईतर दूसरे विषय में एमए या एमएससी करना चाहता है तो पिछले वर्ष तक उनकी अलग मेरिट बनती थी लेकिन इस साल नियम में बदलाव किया गया है। इस साल विद्यार्थियाें को संबंधित विषय की प्रवेश परीक्षा में शामिल किया गया। इसकी मेरिट के आधार पर प्रवेश लिए जा रहे हैं। इसके विपरीत अदर सब्जेक्ट के विद्यार्थियों के लिए कई अन्य मानक भी तय किए गए हैं। खास यह कि अलग-अलग विषयों के मानक में भी भिन्नता है। मनोविज्ञान की अध्यक्ष प्रोफेसर रश्मि कुमार का कहना है कि एमए या एमएससी में दाखिला लेने वाले अदर सब्जेकट के विद्यार्थियों के लिए स्नातक में प्रथम श्रेणी की बाध्यता पहले से है। कई अन्य विषयों में भी इसी तरह की शर्त है। इसी आधार प्रवेश से रोका गया है। आइसा से जुड़े छात्र-छात्राओं ने यह शर्त वापस लेेने की मांग की है। प्रदेश सचिव सुनील मौर्य का कहना है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे आंदोलन के बाध्य होंगे। उन्होंने डबल एमए के लिए 60 फीसदी की बाध्यता खत्म करने की भी मांग की।