फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court : सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए आदेश में जज का नाम लिखना गैरजरूरी

Sun, 08 Feb 2026 02:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और अधीनस्थ न्यायालयों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए जजों के नाम लिखने को गैरजरूरी बताया। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने कहा कि पूर्व में भी इस पर चेतावनी दी जा चुकी है।
विज्ञापन
अदालत - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और अधीनस्थ न्यायालयों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए जजों के नाम लिखने को गैरजरूरी बताया। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने कहा कि पूर्व में भी इस पर चेतावनी दी जा चुकी है। ऐसे मामलों में केवल साइटेशन, केस नंबर, पक्षकारों के नाम, निर्णय की तिथि और जिस अंश पर निर्भर किया जा रहा है, वही लिखा जाए।

विज्ञापन


मेरठ निवासी याची प्रियंक कुमार ने अपने रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। आरोप लगाया था कि रिश्तेदारों ने उसके भाई को मेडिकल कॉलेज में क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लिए थे। याची के अनुसार उसने एक डॉक्टर के बैंक खाते में 50 हजार रुपये ट्रांसफर किए। बाद में चार लाख रुपये नकद भी दिए। नौकरी न मिलने और रकम वापस न होने पर उसने सीआरपीसी की धारा-156(3) के तहत जिला अदालत में आवेदन दिया था।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर सत्र न्यायाधीश मेरठ ने उसकी शिकायत खारिज कर दी। याची ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मेरठ के अपर सत्र न्यायाधीश (पुनरीक्षण न्यायालय) ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए उस पीठ में शामिल जजों के नाम भी लिख दिए थे। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें