बीएसए को नया आदेश पारित करने का निर्देश
इस आदेश के खिलाफ याची ने बीएसए की ओर से 21 जुलाई 2025 को पारित आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता कमल कुमार केसरवानी ने दलील दी कि 1989 के बाद राज्य सरकार ने आठ दिसंबर 2008 और तीन दिसंबर 2012 को नया शासनादेश जारी किया। इसके तहत अविवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन का अधिकार दिया गया है। इसके बावजूद विभाग ने इन आदेशों पर कोई विचार नहीं किया। यही नहीं, हाईकोर्ट के कुमारी हसीन बी के मामले में निर्धारित विधि व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया।
सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से दी गई जानकारी (निर्देश) में पाया गया कि विभाग ने 2008 और 2012 के शासनादेश का उल्लेख नहीं किया और न ही कोर्ट की विधि व्यवस्था आदेश का जिक्र किया। इससे स्पष्ट होता है कि अधिकारियों में बिना याचिका का अध्ययन किए जानकारी औपचारिकता वश कोर्ट में भेज दी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए बीएसए को निर्देश दिया है कि वह याची को सुनवाई का अवसर देते हुए नया आदेश पारित करें।