इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच कार्यवाही में मौखिक साक्ष्य पेश करने का अवसर देना जरूरी है। ऐसा न करने पर कोर्ट ने दंडादेश रद्द कर याची को बहाल करने का निर्देश दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच कार्यवाही में मौखिक साक्ष्य पेश करने का अवसर देना जरूरी है। ऐसा न करने पर कोर्ट ने दंडादेश रद्द कर याची को बहाल करने का निर्देश दिया। सक्षम प्राधिकारी को नया जांच अधिकारी नियुक्त कर नियमानुसार याची को सुनवाई का मौका देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार की एकलपीठ ने मुन्नीलाल पटेल की याचिका पर दिया।
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याची बांदा के बड़ोखर तहसील में संयुक्त बीडीओ पद पर तैनात था। काम में लापरवाही व उच्च अधिकारियों की बात न मानने का आरोप लगाकर विभागीय जांच में दोषी करार देते हुए संयुक्त बीडीओ से सहायक बीडीओ पद पर पदावनति कर दिया गया है। इसे याची ने चुनौती दी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। याची को गवाहों के परीक्षण सहित दस्तावेज व मौखिक साक्ष्य पेश करने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसे में जांच कार्यवाही नियम विरुद्ध है।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मौखिक साक्ष्य पेश करने, गवाहों को बुलाने व परीक्षण करने सहित दस्तावेज प्राप्त कराना जरूरी है। मौखिक साक्ष्य का अवसर दिए बगैर दी गई जांच रिपोर्ट वैध नहीं मानी जा सकती।