यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम बस्ती जिले में तैनात अधिशासी अभियंता संजय सिंह की याचिका पर दिया है। याची ने प्रबंध निदेशक की ओर से दो वार्षिक वेतन वृद्धि, परिनिंदा व चेयरमैन की ओर से पदावनति कर सहायक अभियंता बनाने के आदेशों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने सभी आदेशों को अवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप सिद्ध होने से पहले कर्मचारी को वृहद दंड नहीं दिया जा सकता। आरोप सिद्ध करने के लिए निर्धारित जांच प्रक्रिया का पालन किया जाना अनिवार्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम बस्ती जिले में तैनात अधिशासी अभियंता संजय सिंह की याचिका पर दिया है। याची ने प्रबंध निदेशक की ओर से दो वार्षिक वेतन वृद्धि, परिनिंदा व चेयरमैन की ओर से पदावनति कर सहायक अभियंता बनाने के आदेशों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने सभी आदेशों को अवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया।
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याची को सवेतन अधिशासी अभियंता के पद पर बहाल करते हुए कोर्ट ने विभाग को नियमानुसार जांच पूरी करने की स्वतंत्रता दी है। याची के अधिवक्ता ऋतेश श्रीवास्तव व श्वेता सिंह ने दलील दी कि याची के बस्ती जिले में तैनाती के दौरान उसे मेसर्स सिक्योर मीटर्स लिमिटेड अहमदाबाद के सिंगल फेस दो मीटर वायर का निरीक्षण करने के लिए भेजा गया। इसके बाद याची के आचरण को लेकर उसके खिलाफ आरोप पत्र जारी कर दिया गया। याची ने आरोप पत्र का जबाव भी दिया। लेकिन, विभाग ने उस पर विचार किए बिना याची के खिलाफ आदेश पारित कर दिया। आदेश पारित करने से पहले जांच अधिकारी ने साक्ष्य व गवाहों के परीक्षण नहीं किया।