नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आईटी सर्विसेज के लिए आवंटित भूमि का उपयोग रिहायशी और व्यवसायिक बहुमंजिला इमारतें बनाने में उपयोग करने का आरोप है। इस मामले को लेकर गौतमबुद्ध नगर के शैलेश ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से पूछा है कि आईटी सर्विसेज के लिए आवंटित भूमि के उपयोग की शर्तें क्या हैं। क्या इनके अनुरूप काम रहा है और यदि नहीं तो उन्होंने क्या कार्रवाई की है।
जनहित याचिका में कहा गया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़े पैमाने पर आईटी से संबंधित कंपनियां और प्रतिष्ठान लगाने के लिए भूमि का आवंटन किया था। मगर अथॉरिटी के अधिकारियों की मिलीभगत से इस भूमि का अधिकांश हिस्सा आवासीय और व्यवसायिक उपयोग में इस्तेमाल किया जा रहा है। अथॉरिटी के वकीलों का कहना था कि औद्योगिक विकास के लिए अधिग्रहीत भूमि का 25 फीसदी हिस्सा अनिवार्य रूप से आवासीय और व्यवसायिक उपयोग के लिए होता है इसके बिना औद्योगिक विकास संभव नहीं है। जबकि याची का कहना था कि 25 फीसदी से अधिक भूमि बिल्डरों को आवासीय और व्यवसायिक उपयोग के लिए आवंटित कर दी गई हैं।
खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से पूछा है कि आईटी सर्विसेज के लिए आवंटित भूमि के उपयोग का नियम क्या है। भूमि का कितना हिस्सा व्यवसायिक और आवासीय उपयोग के लिए इस्तेमाल किया गया है। यदि कहीं गड़बड़ी है तो अथॉरिटी ने क्या कदम उठाए हैं। याचिका पर 17 जुलाई को सुनवाई होगी।