Prayagraj News : इलाहाबाद विवि के भौतिक विज्ञान में आयोजित सेमिनार में बोलते डॉ. मूर्ति रैमिल्ला।
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1980 से सेटेलाइट इमेज का रिकॉर्ड है। इससे पता लगाया जा सकता है कि किसी क्षेत्र में दस वर्ष पहले कितने पेड़ थे और अब कितने फीसदी पेड़ बचे हैं। भविष्य में पर्यावरण के साथ जल संरक्षण की दिशा में भी सेटेलाइट इमेजरी सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। दक्षिण भारत के कई ऐसे राज्य हैं, जहां सेटेलाइट इमेज से मछुआरों को जानकारी दी जाती है कि नदी के किस हिस्से में अधिक मछलियां हैं। इससे मछुआरों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
वहीं, ट्रैफिक कंट्रोल में भी सेटेलाइट इमेज काफी मददगार हो सकती है। इससे एक्सीडेंट जोन को भी चिह्नित कर वहां आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं। इसी आधार पर उचित स्थानों पर अस्पतालों की स्थापना भी की जा सकती हैै। कार्यक्रम के संयोजक इविवि के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो.केएन उत्तम ने विश्वविद्यालय आने के लिए डॉ.मूर्ति के प्रति आभार व्यक्त किया।