अगर शुरुआती समय में इसपर ध्यान न दिया जाए तो पथरी का आकार बढ़ने लगता है और अंत में इसके उपचार के लिए सर्जरी का ही विकल्प बचता है। ऐसे में अगर पित्त की थैली में पथरी के लक्षण महसूस हों तो बिना देर किए चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। वहीं, दूसरी तरफ गुर्दे की पथरी अधिकतर 20 से 40 वर्ष की आयु के बीच ज्यादा देखने को मिलती है। इसका मुख्य कारण होता है डाइट का तरीका बदलना।
अधिकतर युवा पानी कम पीते हैं और जरूरत से ज्यादा कैलोरी के रूप में मांसाहारी, तले-भुने भोजन और जंक फूड का सेवन करते हैं। इसके करण किडनी में पथरी होती है। वैसे देखा जाए तो गुर्दे की पथरी का आकार हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। यह बहुत छोटा होने से लेकर इतना बड़ा हो सकता है कि गुर्दे के भीतरी खोखले हिस्सों को पूरी तरह से भर देता है।
पथरी के कारण का कारण
रसायनों का असंतुलन, अनियमित लाइफ स्टाइल, मोटापा, मधुमेह, गठिया एवं हड्डी रोग आदि पथरी की समस्या के प्रमुख कारण हैं।
किडनी में पथरी की समस्या सबसे ज्यादा अनियमित लाइफ स्टाइल से होती है। 20 से 40 वर्ष के युवाओं को अधिक खतरा रहता है। ऐसे में अधिक मात्रा में पानी पीना और शाकाहारी व बिना तला-भुजा भोजन लेना फायदेमंद है। - डॉ. संतोष मौर्या, प्रोफेसर, नेफ्रोलॉजी विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।