इरफान ने वकील गोपाल चतुर्वेदी, इमरानुल्ला, उपेंद्र उपाध्याय ने दलील दी थी कि आग किसने लगाई, कब लगाई और कैसे लगी यह किसी ने नहीं देखा। शिकायतकर्ता ने सुनी बातों पर मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, शासकीय अधिवक्ता एके संड, एजीए जेके उपाध्याय ने दलील दी थी कि वैज्ञानिक जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्यों में पेट्रोल जैसी गंध पुष्टि हुई है। आरोपियों को आग में पेट्रोलभरी शीशियां फेंकते देखा गया था। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आठ नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। 14 नवंबर को न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे इरफान
विशेष अदालत से सात साल की मिली सजा के खिलाफ इरफान ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट में बार-बार सुनवाई टल रही थी। ऐसे में इरफान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर कोर्ट ने 10 दिन में इलाहाबाद हाईकोर्ट को सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था।
जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे सोलंकी
शासकीय अधिवक्ता के अनुसार पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की जमानत हाईकोर्ट से मंजूर जरूर हो गई है, लेकिन वह जेल से बाहर नहीं निकल पाएंगे। उनके ऊपर गैंगस्टर सहित कई अन्य संगीन मामले दर्ज हैं जो अदालत में विचाराधीन हैं। इसलिए वह जेल में ही रहेंगे।
इरफान की पत्नी नसीम लड़ रहीं चुनाव
इरफान की पत्नी नसीम सोलंकी कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट से उप चुनाव लड़ रही है। सपा ने उन्हें टिकट दिया है। पति इरफान सोलंकी की सदस्यता खत्म होने के बाद यहां पर उप चुनाव हो रहा है और 20 नवंबर को मतदान होना है। इरफान सोलंकी अपनी पत्नी के चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
सरकारी अधिवक्ताओं की दलील
सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता के एम नटराजन, शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार संड ने दलील पेश की। कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक झोपड़ी में आग पटाखे से नहीं बल्कि पेट्रोल और केरोसीन जैसे ज्वलनशील पदार्थ से लगाई गई थी। इरफान, रिजवान समेत सभी आरोपी मौके पर मौजूद थे।
गौरतलब है कि 8 नवंबर 2022 को सपा विधायक इरफान सोलंकी, उसके भाई रिजवान, इजरायल आटेवाला, मो. शरीफ, शौकत अली, अनूप यादव, महबूब आलम, शमशुद्दीन उर्फ चच्चा, एजाजुद्दीन उर्फ सबलू, मो. एजाज, मुरसलीन भोलू, शकील चिकना के खिलाफ नजीर फातिमा ने अपनी झोपड़ी में आगजनी करने का मुकदमा जाजमऊ थाने में दर्ज कराया था। जून 2024 में कानपुर की विशेष अदालत ने इरफान सोलंकी उनके भाई रिजवान, इजरायल आटेवाला, मो. शरीफ व शौकत अली को दोषी करार देते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सभी दोषियों ने अपील दाखिल की है। जबकि राज्य सरकार ने इन्हें उम्रकैद दिए जाने की मांग की है।
क्या थे दोनों पक्षों के तर्क
पिछली सुनवाई पर राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील एम के नटराजन, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार संड और अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम जेके उपाध्याय ने दलीलें पेश की थी। कहा कि इरफान सोलंकी को जमानत दी गई तो वह देश छोड़ कर भाग सकते हैं। गवाहों को डरा, धमका सकते हैं। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट अभियोजन की कहानी का समर्थन करती है। आग पटाखे से नहीं, पेट्रोल व केरोसीन से लगी थी। इरफान और रिजवान अपने साथियों संग मौके पर थे।
इरफान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी, इमरान उल्ला और उपेंद्र उपाध्याय ने इरफान को निर्दोष बताया। कहा कि मुकदमा वादिनी नजीर फातिमा के बयानों में विरोधाभास है। उन्होंने बयान दिया है कि जब वह मौके पर पहुंची तो उनकी झोपड़ी जल रही थी। आग कैसे लगी, किसने लगाई उन्होंने खुद नहीं देखा। सुनी-सुनाई बात के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद जमानत पर फैसला सुरक्षित कर लिया।
इरफान सोलंकी के वकीलों का तर्क
इरफान सोलंकी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी, इमरान उल्ला व उपेंद्र उपाध्याय ने कोर्ट में कहा कि मुकदमा वादिनी नजीर फातिमा की ओर से विवेचक को दिए गए बयान, कलमबंद और कोर्ट ने दिए गए बयानों में विरोधाभास है। नजीर फातिमा ने गवाही और जिरह में स्वीकार किया कि झोपडी में आगजनी कब, कैसे लगी, व किसने लगाई उसे मालूम नहीं है। जब वह घटना स्थल पर पहुंची तब उसका घर जल रहा था। लिहाजा, मुकदमा वादिनी प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। इरफान सोलंकी को राजनैतिक रंजिश के तहत फंसाया गया है।
यह है पूरा मामला
गौरतलब है कि जाजमऊ थाना क्षेत्र के डिफेंस कॉलोनी निवासी नजीर फातिमा की झोपड़ी में आग लगाने के मामले में कानपुर नगर की एमपी/एमएलए की विशेष अदालत ने इरफान , उसके भाई रिजवान समेत दस को सात साल कारावास की सजा सुनाई थी। सजा को रद्द करने की मांग के साथ इरफान और रिजवान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, प्रदेश सरकार ने सात साल की सजा की नाकाफी बताते हुए उम्रकैद की मांग की है।