कानपुर के ग्रीन पार्क में प्रस्तावित आईपीएल सीरीज के मैचों पर प्रतिबंध लगाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। कानपुर महानगर जनकल्याण समिति ने जनहित याचिका दाखिल कर मैचों का आयोजन रोकने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सूखे की चपेट में है। कानपुर शहर में भी पानी का घोर संकट है। इस स्थिति में मैच में लाखों लीटर पानी बर्बाद होगा। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति यूसी श्रीवास्तव की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से मैच में होने वाले पानी के खर्च, कानपुर में पानी की उपलब्धता आदि की जानकारी मांगी है। याचिका पर सोमवार 16 मई को सुनवाई होगी।
याचिका का विरोध करते हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय और अनुराग श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि कानपुर शहर को प्रतिदिन 420 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि स्टेडिएम को हरा रखने के लिए दशमलव 22 (.22) एमएलडी पानी ही चाहिए। बताया कि प्रदेश के सभी स्टेडिएम में घास को हरा रखने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है। यह सतत प्रक्रिया है। याची का कहना है कि कानपुर में 19 और 21 मई को आईपीएल मैचों का आयोजन होना है। बांबे हाईकोर्ट ने पानी की बर्बादी के कारण ही महाराष्ट्र में आईपीएल के आयोजन पर रोक लगा दी है। उत्तर प्रदेश में भी सूखे के हालात वैसे ही हैं। इस समय पानी बचाने की आवश्यकता है न कि मैच के आयोजन पर बर्बाद करने की। याचिका में कानपुर में प्रकाशित कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया गया है।