रेलवे बोर्ड ने चीफ लोको इंस्पेक्टर (सीएलआई) के वेतन निर्धारण में नियमों के कथित उल्लंघन और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। बोर्ड ने यह कदम कई जोनल रेलवे में वेतन समानता लाभ को अपात्र कर्मचारियों को दिए जाने की गंभीर शिकायतों के बाद उठाया है।
रेलवे बोर्ड ने चीफ लोको इंस्पेक्टर (सीएलआई) के वेतन निर्धारण में नियमों के कथित उल्लंघन और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। बोर्ड ने यह कदम कई जोनल रेलवे में वेतन समानता लाभ को अपात्र कर्मचारियों को दिए जाने की गंभीर शिकायतों के बाद उठाया है।
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बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) समेत सभी जोनल रेलवे के प्रिंसिपल चीफ पर्सनल ऑफिसर्स (पीसीपीओ) को एक पत्र जारी कर निर्देश दिया है। कहा है कि पिछले 10 वर्षों (2016 से 2026 तक) में सीएलआई को दिए गए सभी वेतन समानता लाभ के मामलों की फिर से गहन समीक्षा की जाए।
दरअसल, रेलवे बोर्ड को यह शिकायत मिली है कि कई जोनल रेलवे में वर्ष 2009 और 2019 के आदेशों में निहित अनिवार्य शर्तें पूरी न होने के बावजूद कई कर्मचारियों को यह लाभ दे दिया गया। इससे रेलवे पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा। अमूमन यह लाभ तब दिया जाता है जब किसी जूनियर कर्मचारी का वेतन उसके सीनियर से अधिक हो जाता है, जिसे सीनियर का वेतन जूनियर के बराबर लाकर ठीक किया जाता है।
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रेलवे बोर्ड ने अपने पत्र अहमदाबाद कैट में लंबित दर्जनों मुकदमों का हवाला दिया है। इसमें बताया गया है कि एक बार गलत तरीके से वेतन बढ़ाने के बाद, जब प्रशासन ने गलती सुधारनी चाही तो मामला अदालतों में पहुंच गया। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह फैसले का भी जिक्र किया है, जो प्रशासनिक त्रुटि के कारण हुए अधिक भुगतान की वसूली पर कुछ स्थितियों में रोक लगाता है।
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक संदीप पाल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि उन अधिकारियों और लिपिकों की भी जवाबदेही तय की जाए जिन्होंने नियमों के विरुद्ध इन फाइलों को प्रोसेस या अप्रूव किया था। दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार स्टाफ पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में एनसीआर सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि बोर्ड के आदेश के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।