आशाओं की भर्ती में हुई गड़बड़ी के मामले पर स्वास्थ्य विभाग ने चुप्पी साध रखी है। मामला प्रकाश में आने पर शासन ने डीएम को जांच करने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को जांच करने के लिए कहा था।
आशाओं की भर्ती में हुई गड़बड़ी के मामले पर स्वास्थ्य विभाग ने चुप्पी साध रखी है। मामला प्रकाश में आने पर शासन ने डीएम को जांच करने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को जांच करने के लिए कहा था। लेकिन अभी तक मामले की जांच शुरू नहीं हो पाई।
विज्ञापन
बता दें कि 2023 में 467 रिक्त पदों के लिए हुई भर्ती में 400 आशाओं की नियुक्ति मानक के विपरीत की गई। इस चयन प्रक्रिया में जिलाधिकारी का अनुमोदन तक नहीं लिया गया। मामले में तत्कालीन एसीएमओ डॉ. तरुण पाठक व वर्तमान में तैनात डीसीपीएम अशफाक अहमद का नाम सामने आया था और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा था। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी से अनुमोदन के बाद आशाओं का चयन किया जाता है। साथ ही जिस गांव में चयन होना है, वहां खुली बैठक होती है। जिसमें ग्राम प्रधान, एएनएम और सेक्रेटरी शामिल होते हैं। गांव की अभ्यर्थी करतीं हैं। लेकिन, इस मामले में दोनों ही प्रक्रियाएं नहीं पूरी कराई गईं।
कीडगंज निवासी बलराम पांडेय ने मुख्यमंत्री से मामले की शिकायत की थी। इतना ही नहीं भगवतपुर विकासखंड में भी 300-400 की आबादी पर ही आशा की नियुक्ति कर दी गई। जबकि नियम है कि एक हजार की आबादी पर एक आशा की नियुक्ति होनी है। जनपद के 21 विकासखंडों के गांवों में जो चयन हुए उसमें मनमानी की बात सामने आई। इस मामले को अमर उजाला ने 25 अक्तूबर 2023 को प्रकाशित किया था। इसी मसले पर अपर निदेशक की तरफ से नौ दिसंबर को जांच कराने का निर्देश दिया गया। लेकिन अब तक जांच शुरू न हो सकी।