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inspirational news : विशेष बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, कागजों पर उकेरी मन की बात

Sun, 29 May 2022 12:56 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अशोक नगर स्थित ‘स्नेह स्कूल फॉर स्पेशल चिल्ड्रेन’ में वह कलर थेरेपी, स्वीमिंग थेरेपी के जरिये एडीएचए, ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम से जूझ रहे बच्चों का इलाज करते हैं। बच्चों के साथ स्कूल में रोज पांच से छह घंटे बिताते हैं।
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सांकेतिक चित्र। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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औरों की तरह इनकी भी ख्वाहिश दुनिया को मुट्ठी में कर लेने की है। अटेंशन डिफिशिएंसी हाइपर एक्टिविटी (एडीएचए) बीमारी से जूझ रहे एक बच्चे को जब किसी स्कूल में एडमिशन नहीं मिल रहा था, तब इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के मनोविज्ञान विभाग के पुरा छात्र सुशील ने उस बच्चे का हाथ थामा और उसे इतना काबिल बना दिया कि वह आज शहर के प्रतिष्ठित स्कूल में कक्षा-नौ का छात्र है और परीक्षा में उसने तीसरा स्थान प्राप्त किया। 

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ऐसे ही कई बच्चों की देखरेख में लगे इविवि के पुरा छात्र सुशील ने विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में एमए किया। कथक, तबला और गिटार से भी पीजी का कोर्स पूरा किया। मन तो न्यूरो सर्जन बनने का था, पर किस्मत कहीं और लेकर गई। अब वह एडीएचए, ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम जैसी मानसिक बीमारियों से पीड़ित बच्चों का मनोवैज्ञानिक तरीके से इलाज करते हैं। उन्होंने यह काम वर्ष 2013 से शुरू किया था, जब ऐसी ही किसी बीमारी से पीड़ित साढ़े तीन साल की बच्ची को उन्होंने गोद लिया था। उसका नाम अहाना रखा और फिर 2014 में ऐसे विशेष बच्चों के लिए एक विशेष स्कूल खोला।


अशोक नगर स्थित ‘स्नेह स्कूल फॉर स्पेशल चिल्ड्रेन’ में वह कलर थेरेपी, स्वीमिंग थेरेपी के जरिये एडीएचए, ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम से जूझ रहे बच्चों का इलाज करते हैं। बच्चों के साथ स्कूल में रोज पांच से छह घंटे बिताते हैं। विश्वविद्यालय छोड़ने के बाद भी वह विभाग से जुड़े हैं, सो इस काम में विभाग के कुछ लोगों से आर्थिक सहयोग मिल जाता है और बाकी इंतजाम सुशील लोगों की थेरेपी से आने वाली धनराशि से करते हैं।
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सुशील के स्कूल में 15 विशेष बच्चे हैं, जो किसी न किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं। बकौल सुशील एडीएचए एक ऐसी बीमारी है, जिसमें बच्चा सामने लगे ब्लैक बोर्ड को देख तो सकता है, लेकिन उस पर प्रदर्शित अक्षर या तस्वीर कागज पर नहीं उतार सकता। 


ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे अपने में खोए रहते हैं। अब इन बच्चों ने साबित किया है कि वोे भी किसी से कम नहीं हैं। ऐसे बच्चों ने खूबसूरत चित्रों के जरिये अपने सपनों को कागजों पर उकेरा है। इविवि के मनोविज्ञान विभाग में 30 एवं 31 मई को होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इन बच्चों के चित्रों की अलग से प्रदर्शनी लगाई जाएगी। सुशील मानते हैं कि विशेष बच्चे अन्य बच्चों के मुकाबले अधिक प्रतिभाशाली होते हैं, क्योंकि विपरीत परिस्थितियों से जूझकर इन्होंने जीतना सीखा है।

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कोविड में हुए सामाजिक बदलावों पर मंथन को जुटेंगे विशेषज्ञ
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में 30 एवं 31 मई को ‘वैश्विक महामारी के समय में संगठनों एवं समाज में मनो-सामाजिक परिवर्तन’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोेेजित किया जाएगा। इसका उद्घाटन 30 मई को सुबह 9.30 बजे सीनेट हॉल में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव करेंगी।


विभागाध्यक्ष प्रो. नीना कोहली के अनुसार सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ सर कैरी लिन कूपर, डॉ. बैरी रूबैक, प्रो. रामाधार सिंह आदि शामिल होंगे। कोविड के कारण सामाजिक घृणा बढ़ी है या नहीं, कार्यस्थल पर किस प्रकार के बदलाव सामने आए हैं, कोविड की वजह से अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के स्वभाव में क्या परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं, इन सभी मुद्दों पर मंथन किया जाएगा। सम्मेलन में 70 से अधिक रिसर्च पेपर भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
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