सिविल पुलिस और पीएसी में 4010 उपनिरीक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में व्हाइटनर का प्रयोग करने के वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल करने का फैसला सरकार के गले की हड्डी बन गया है। हाईकोर्ट ने परीक्षा से संबंधित मूल दस्तावेज तलब कर लिए हैं। कोर्ट ने जांच के लिए बनी कमेटियों की रिपोर्ट तथा वह ओएमआर शीट मंगा ली है, जिनमें व्हाइटनर या दस्तावेज का प्रयोग किया गया है। याचिका पर अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी।
व्हाइटनर प्रयोग की शिकायत को लेकर अभ्यर्थी साकेत कुमार आदि ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याची के वकील सीमांत सिंह ने बताया कि सुनवाई कर रहे जस्टिस पीकेएस बघेल ने सरकार से जवाब मांगा था।
कोर्ट जानना चाह रही थी कि जब निर्देश पुस्तिका में व्हाइटनर और ब्लेड का प्रयोग वर्जित है तो किस प्रकार से ऐसी उत्तर पुस्तिकाओं को जांचा गया। बिना लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किए अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए कैसे बुला लिया गया। प्रदेश सरकार ने बताया कि ओएमआर शीट पर व्हाइटनर या ब्लेड प्रयोग करने की जांच कराई जा रही है। दो स्वतंत्र एजेंसियों को जांच पर लगाया गया है। इनके काम की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जांच कार्य में लगे लोगों को किसी प्रकार की भी इलेक्ट्रानिक डिवाइस भीतर ले जाने की इजाजत नहीं होगी।
उल्लेखनीय है कि दरोगा भर्ती के लिए मुख्य परीक्षा का आयोजन 14 नवंबर 2014 को किया गया। परीक्षा के निर्देश पुस्तिका में ही बताया गया था कि ओएमआर शीट पर व्हाटनर या ब्लेड लगाने वालों की कॉपियां नहीं जांची जाएंगी। आरोप है कि इसके बावजूद कुछ लोगों ने व्हाइटनर का प्रयोग किया और उनको लिखित परीक्षा में पास करके साक्षात्कार में बुला लिया गया। अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि अधिकारियों की सांठ-गांठ से न सिर्फ व्हाइटनर लगाने वालों की उत्तर पुस्तिकाएं जांची गई बल्कि इसी की आड़ में तमाम चहेतों की कॉपियों में व्हाइटनर लगाकर उनके गलत सवालों को सही किया गया।