इससे भूजल स्तर भी गिरने का खतरा है। गंगा, यमुना समेत 13 सहायक नदियों में वैसे भी जलस्तर लगातार तेजी से गिर रहा है। ऐसे में कुंभ के नाम पर हरे पेड़ों की बलि नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि महायोजना के तहत जिन सड़कों का चौड़ीकरण किया जाना है, वहां काम शुरू करने से पहले आक्सीजनदायी पौधों का रोपण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वरना इस तरह हरे पेड़ों को काटना जिले की 70 लाख से अधिक आबादी के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस पर सहायक वन महानिरीक्षक (वन सुरक्षा) ने संज्ञान लिया है।
उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को इस मामले की जांच का आदेश दिया है। कहा है कि इस मामले की जांच की जाए। आखिर बिना शिफ्टिंग केे उपायों पर अमल किए पेड़ कैसे काटे जा रहे हैं। सहायक वन महानिरीक्षक शोभिता ने इस मामले में मौजूदा अधिनियमों और अन्य प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने के लिए भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक को निर्देशित किया है।
उन पेड़ों को ही काटा जा रहा है जिन्हें बचाना संभव नहीं
इस मामले में पीडीए के अफसरों का कहना है कि जिन पेड़ों को बचाया जाना संभव नहीं हो पा रहा है, वही काटे जा रहे हैं। इसके लिए हाईकोर्ट के निर्देशन में बनी कमेटी की ओर से चौड़ीकरण की जद में आने वाले पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई है। इस कमेटी में डीएम नवनीत सिंह चहल भी शामिल हैं। जितने पेड़ कटेंगे उनकी तुलना में 10 गुना अधिक पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि ग्रीन कुंभ का सपना साकार हो सके।
रेलवे ने 12 पेड़ों की शिफ्टिंग कर पेश की है नजीर
रेलवे ने पिछले वर्षों में जिले में दारागंज, झूंसी समेत कई जगहों पर निर्माण के दौरान बाधा बनने वाले 12 पेड़ों की सफलतापूर्वक शिफ्टिंग कराकर मिसाल पेश की है। रेलवे विकास निगम के महाप्रबंधक वीके अग्रवाल के मुताबिक परेड और आसपास के इलाकों में इन पेड़ों की शिफ्टिंग कराई गई थी। इनमें से 11 पेड़ बचा लिए गए हैं।