15 जून 2024 तक एम्स पटना में उन्हें ज्वाइन करना है, लेकिन देरी होने पर नौकरी खोनी पड़ेगी। बीएचयू अंतिम क्षण में आश्चर्यजनक रूप से उन्हें 5,51,434 रुपये का बकाये का भुगतान करने के लिए कहा है। इतनी बड़ी रकम इकट्ठा करने में वक्त लग जाएगा। ऐसे में पटना एम्स ज्वाइन की तिथि बीत जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि 30 मई 2024 के आदेश का उल्लंघन करने के लिए बीएचयू छल-कपट और तीखे हथकंडों का सहारा ले रहा है। कोर्ट ने कहा कि बीएचयू का आचरण ठीक नहीं है। इससे पहले, बीएचयू याचिकाकर्ता का इस्तीफा स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था। 30 मई 2024 के आदेश के अनुसार इसे स्वीकार किया, लेकिन एक चतुर चाल में बकाया भुगतान की मांग को लाकर याची को हराने का प्रयास किया।
मामूली साधनों वाला व्यक्ति अचानक इस मांग को पूरा नहीं कर पाएगा। कोर्ट ने कहा कि हम आदेश देते हैं कि याचिकाकर्ता को बीएचयू की सेवाओं से तत्काल मुक्त कर दिया जाए। साथ ही कहा कि याची एम्स, पटना की सेवाओं में शामिल होने के लिए स्वतंत्र होगा।