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Prayagraj News: नौकरी की जिद... दांव पर कोख

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डीएसए मैदान में एनसीआर कीओर से ग्रुप डी के पदों के लिएशारीरिक दक्षता परीक्षा में बोरी कंध - फोटो : shiv tripathi
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डीएसए मैदान में रेलवे ग्रुप-डी भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) के दौरान मंगलवार को नौकरी पाने की जिद में गर्भवती महिला अभ्यर्थी अपनी कोख को दांव पर लगाकर मैदान में पहुंच गई। हालांकि, रेलवे प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रसव के छह महीने बाद उसे योग्यता साबित करने का मौका देने का आश्वासन दिया।
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बिहार से गर्भवती अभ्यर्थी पीईटी देने पहुंची थी। स्वास्थ्य और सुरक्षा के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने उसे अस्थायी रूप से अनफिट घोषित कर दिया। प्रयागराज मंडल के पीआरओ अमित कुमार सिंह के अनुसार, महिला के प्रसव के छह महीने बाद उसे पीईटी में शामिल होने का मौका दिया जाएगा।

मंगलवार को डीएसए मैदान में 225 महिला अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। 124 उपस्थित हुईं। अंत में 74 ने सफलता पाई। परीक्षा के दौरान डीआरएम प्रयागराज रजनीश अग्रवाल और एडीआरएम दीपक कुमार भी मैदान में पहुंचे।
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20 किलो की बोरी रख दो मिनट में तय करनी थी 100 मीटर दूरी
महिला अभ्यर्थियों को पीईटी के दौरान दो मिनट के भीतर 20 किलो की बोरी कंधे पर उठाकर 100 मीटर की दूरी तय करनी थी। एक किमी की दौड़ 5.15 मिनट में पूरी करनी थी। तेज धूप की वजह से कई अभ्यर्थी दौड़ खत्म करने के बाद जमीन पर लेट गईं।
यूपीए सरकार के दौरान गर्भवती अभ्यर्थी ने दी थी पीईटी
- यूपीए सरकार के दौरान डीएसए मैदान में ग्रुप-डी की पीईटी में एक गर्भवती महिला अभ्यर्थी शामिल हुई थी। तब इस मामले ने तूल भी पकड़ा था। मुद्दा संसद तक गया था। इसके बाद नियम बदले गए। इसी के तहत परीक्षा के समय महिला उम्मीदवारों को अपनी गर्भावस्था की स्थिति का फॉर्म भरना होता है।

वर्जन
अफसरों की निगरानी में परीक्षा संपन्न हुई। एक गर्भवती महिला पहुंची थी। स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नियमानुसार प्रसव के छह माह बाद मौका देने का आश्वासन दिया गया है। - डॉ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआर।
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