यह भी तर्क दिया गया कि हालांकि, सौ से अधिक छात्रों की संख्या वाले प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय में याचीगण की तरह अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति की जानी है लेकिन राज्य सरकार ने ऐसा करने की बजाय मौजूदा अंशकालिक अनुदेशकों का नवीनीकरण करते हुए निर्णय लिया गया कि नवीनीकरण केवल उन उच्च प्राथमिक विद्यालयों में किया जाएगा, जहां सौ से अधिक छात्र हैं और जहां अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं और पद रिक्त हैं।
कहा गया कि यदि राज्य सरकार को दिनांक 21 मार्च 2023 के सरकारी आदेश में निहित उपरोक्त नीति को लागू करने की अनुमति दी जाती है तो याचीगण जैसे अधिकांश अंशकालिक अनुदेशक का कार्यकाल नवीनीकृत नहीं हो पाएगा। यह 2009 के अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकारी अधिवक्ता को इस संबंध में सरकार से जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।