जिला उपभोक्ता आयोग ने राजापुर कैंट स्थित आशा हॉस्पिटल, आर्थो सर्जन डॉ. पियूष मिश्रा और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के जनरल मैनेजर पर 1.35 लाख का हर्जाना लगाया है। मोहल्ला धूमनगंज, खागा (फतेहपुर) निवासी शौकत अली ने सड़क हादसे में हाथ फैक्चर होने पर इलाज करवाया था, लेकिन कुछ ही दिन बाद हाथ में इंफेक्शन हो गया। बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने के बाद भी इलाज नहीं मिला। 19 जून, 2007 को शौकत का सड़क हादसे में बायां हाथ फैक्चर हो गया था। 20 जून को वह आशा हॉस्पिटल में डॉ. पियूष मिश्रा से मिले। उनकी सलाह पर अस्पताल में इलाज चला।
डॉक्टर ने बताया कि हाथ का ऑपरेशन होगा और इसमें प्लेटें डाली जाएंगी। सहमति के बाद फीस जमा करवाने के बाद प्लेटें डाल दी गईं, लेकिन, डॉक्टर की लापरवाही और सेवा में कमी से हाथ में इंफेक्शन हो गया। दिन पर दिन दिक्कत और बढ़ गई। इससे परेशान होकर अस्पताल के डॉक्टर को कहा, लेकिन इलाज के नाम पर बार-बार सिर्फ आश्वासन दिया गया। इलाज के बहाने एक लाख वसूल कर 14 अगस्त 2007 तक टालमटोल करते रहे।
मुंबई में इलाज कराने पर 19 लाख खर्च
राहत नहीं मिलने पर पीड़ित ने 12 नवंबर, 2007 को मुंबई के होली फैमिली हॉस्पिटल में इलाज करवाया। वहां के डॉक्टर ने बताया कि न तो सही ऑपरेशन हुआ है और ना ही प्लेटें ठीक ढंग से डाली गई हैं। इसी वजह से इंफेक्शन हुआ था। पीड़ित के इलाज में 19 लाख रुपये खर्च हो गए। वादी अरब देश में काम करता था, लेकिन इस दिक्कत की वजह से वह वापस जा नहीं जा सका। इस पर वादी ने दो जनवरी, 2009 को आयोग में केस दायर किया।
एक लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान
आयोग के अध्यक्ष मो. इब्राहिम और सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी की बेंच ने फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि निर्णय की तिथि से दो माह में वादी को 1.35 लाख रुपये आठ फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इसके अलावा शारीरिक कष्ट के लिए क्षतिपूर्ति के रूप में एक लाख रुपये व अन्य खर्च के लिए 5,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान अदा करने होंगे। वहीं, विपक्षी की ओर से दलील दी गई कि डॉक्टर से धन उगाही और छवि खराब करने की नियत से केस फाइल किया गया। इलाज सफल किया गया था कोई भी लापरवाही नहीं बरती गई थी।
नहीं हुई लापरवाही, फैसले को कोर्ट में देंगे चुनौती
आशा हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सुजीत सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में हैं। इलाज डॉ. पीयूष मिश्रा ने किया था। इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। इसमें मुख्य चिकित्साधिकारी की रिपोर्ट भी लगी हुई है। इसमें लापरवाही जैसी कोई बात सामने नहीं आई थी। अस्पताल से कोई लेना-देना नहीं है। फिर भी अस्पताल प्रबंधन इस फैसले को कोर्ट में चैलेंज करेगा।