इलाहाबाद। ओलंपिक में पीवी सिंधु के प्रदर्शन से संगमनगरी की महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों में उत्साह है। वे भी पीवी सिंधु की तरह देश के लिए मेडल हासिल करने की कतार में लगी हैं। उनका कहना है कि मेहनत करने में हम पीछे नहीं हैं। बेहतर सुविधाएं मिले तो बेहतरीन प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ा सकतीं हैं। इस संबंध में अमिताभ बच्चन स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खेलने वाली बैडमिंटन खिलाड़ियों से बात की गई तो उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी।
साइना नेहवाल से प्रभावित प्राची केसरवानी ने कहा हममें जीतने का जज्बा है। बीते चार साल से बैडमिंटन कोर्ट में घंटों अभ्यास कर रहे हैं। अन्य देशों के खिलाड़ियों से जब तुलना करते हैं तो हम मेहनत और खेल की तकनीकी में भी खुद को कम नहीं मानते लेकिन जहां इंटरनेशनल स्तर की बात आती है तो हमें मायूस होना पड़ता है। हमारे यहां सुविधाएं स्थानीय स्तर की ही हैं। इंटरनेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए सुविधाएं भी उसी स्तर की होनी चाहिए।
पांच घंटे रोजाना अभ्यास करने वाली शाइमा अख्तर का सपना देश के लिए मेडल हासिल करना है। उनका कहना है कि हम अपने स्तर से कोई कमी नहीं कर रहे हैं जैसे ही इंटरनेशनल स्तर का कोर्ट तैयार होगा हमारी मेहनत रंग लाने लगेगी। हमारे खाते में भी उपलब्धियां होंगी।
पीवी सिंधु को रोल माडल मानने वाली अनुतोषिका बेबाकी से कहती हैं कि हमें अपने पर भरोसा है। ईमानदारी से की जाने वाली मेहनत करने का परिणाम अवश्य ही मिले यदि पर्याप्त सुविधाएं हासिल हों। हमें अभ्यास के लिए शटल कॉक भी गिनती की मिलती है।
कक्षा चार की छात्रा एलिजा बेथनी ओलंपिक में मेडल लाने के इरादे से घंटों अभ्यास करती हैं। एलिजा ने कहा कि मेडल के इरादे से बैडमिंटन का रैकेट पकड़ा है। सपोर्ट मिला तो सफलता भी मिलेगी। रश्मि सिंह ने कहा कि बैडमिंटन में इंटरनेशनल स्तर पर बेटियों ने देश का परचम लहराया है। यह सिलसिला थमने वाला नहीं है।
खेलने के लिए कोर्ट नहीं, प्रैक्टिस भी बन्द
उत्तर भारत में खिलाड़ियों के ऊपर पर्याप्त मात्रा में ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खिलाड़ियों के खेलने केलिए कोर्ट ही नहीं है। संगम नगरी का भी ऐसा ही हाल है। डेढ़ साल से नया हाल बनने से खिलाड़ियों की प्रैक्टिस पूरी तरह से बंद हैं। एक कोर्ट है। उसमें भी खिलाड़ियों के साथ शौकिया लोग भी खेलते हैं जबकि दक्षिण भारत में एक-एक खिलाड़ी के ऊपर बेहतर ध्यान दिया जाता है। कोच भी काफी मेहनत करते हैं। दक्षिण भारत की एकेडेमी प्रोफेशनल तरीके से खिलाड़ियों को तैयार करती हैं। उत्तर भारत में अभी ऐसा नहीं हो पा रहा है।
- अभिन्न श्याम गुप्ता, ओलंपियन एवं अर्जुन एवार्डी