अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी ने कहा कि यह उन भक्तों का बलिदान है। संत अपनी 12 वर्षों की तपस्या का फल मां गंगा की शुद्धता के लिए समर्पित करते हैं। अखाड़ा सनातन की परंपरा का दिव्य दर्शन कराता है। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद महाराज ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन जो घटना घटी, उसके बाद संतों व अखाड़ों ने स्नान तो किया परंतु उत्साह नहीं था। सनातन सभी को माथे पर रखता है। हम विश्व गुरु नहीं, हम तो ब्रह्मांड गुरु हैं।
महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा कि मौनी अमावस्या के अवसर पर हुई दुखद घटना से पूरा संत समाज व्यथित है।जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि लुप्त सरस्वती यहां पूज्य संतों की वाणी से प्रकट हो रही है। उन्होंने आगामी विशेष तिथियों पर सावधानी से प्रशासन के आदेशों का पालन करते हुए अनुशासन के साथ स्नान करने का संदेश दिया। सम्मेलन में साध्वी चित्रलेखा, डॉ. गिरीश योगी, डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती, फलाहारी बाबा, स्वामी अभयदास महाराज समेत अनेक संत मौजूद रहे।
हमें खुद जिम्मेदारी निभानी होगी
विधायक महंत बालकनाथ महाराज ने कहा कि महाकुंभ की घटना हम सभी को जिम्मेदारियों का अहसास कराती है और षड्यंत्रों की ओर भी ध्यान आकर्षित कराती है। यह हमारी एकता और संस्कृति को खंडित करने का षड्यंत्र भी हो सकता है। जिन भक्तों का देवलोक गमन हुआ है, उनकी आत्मा संगम के आचंल में है। आने वाले कुंभ में और व्यवस्थाएं बढ़ें, इसके लिए सभी को कार्य करना है। संगम की रज में स्नान करने से भी उतना ही पुण्य प्राप्त होता है, जितना संगम में स्नान करने से।
शव व शिव पर राजनीति नहीं की जाती: धीरेंद्र शास्त्री
बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि महाकुंभ में जो घटना घटी, वह अत्यंत दुखद है। जिन्होंने भी प्रयाग में शरीर छोड़ा है, उनके लिए यह महासंत सम्मेलन श्रद्धांजलि के तौर पर समर्पित है। यहां संतों ने पहले देश को स्नान कराया फिर खुद स्नान किया। घटना दुखद है परंतु शव व शिव पर राजनीति नहीं की जाती। सरकार ने कोशिश की, परंतु श्रद्धा का उबाल है। गंगा के तट पर शरीर त्याग करना मोक्ष है। घटना की सूक्ष्म जांच की जाए तो अराजक तत्वों की जानकारी मिलेगी। प्रशासन ने जितनी जल्दी घायलों को अस्पताल पहुंचाया, वह प्रशंसनीय है।