जानती नहीं हो तुम किसके सामने खड़ी हो
वर्ष 1904 में ब्रिटिश शासन ने कॉर्नेलिया को बंगाल, बिहार, उड़ीसा (अब ओडिशा) और असम में कोर्ट ऑफ वार्ड की लीगल एडवाइजर नियुक्त किया, जिसका काम महिलाओं और अनाथों को कानूनी सहायता देना था। रियासतों से संबंधी अदालतों में जब पैरवी करने का मौका मिला तो भी उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की गई। एक बार एक नामचीन भारतीय वकील ने उनसे कहा कि तुम जानती भी हो कि किसके सामने खड़ी हो...।
मैडम, कोर्ट आपका ड्राइंगरूम नहीं...
कॉर्नेलिया की बायोग्राफी लिखने वाली सुपर्ना गूप्तू लिखती हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक बार कॉर्नेलिया के सामने देश के बड़े वकील थे, जिन्होंने उनकी ड्राफ्टिंग को तथ्यहीन काव्यात्मक लेख बताते हुए मजाक उड़ाया। उनकी टिप्पणी को कॉर्नेलिया ने पेशेवर व्यवहार के विरुद्ध बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई तो उन्होंने कहा कि मैडम-यह कोर्ट है, आपका ड्राइंगरूम नहीं, शिष्टाचार के लिए मत रोइए।
कोर्ट ऑफ वार्ड में मैडम कॉर्नेलिया सोराबजी के काम का कोई सानी नहीं है। हालांकि, उन्होंने अदालतों में जिन व्यवधानों का सामना किया, आज भी महिला वकील उन दिक्कतों से रूबरू हो रही हैं। - अशोक मेहता, अपर महाधिवक्ता एवं पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत सरकार