इसी तरह महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में जानसेनगंज के दरबेश्वरनाथ मंदिर के पास से जुलूस निकाला गया था। इस जुलूस को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। प्रयागराज का इतिहास लिखने वाले साहित्यकार अनुपम परिहार बताते हैं कि भीड़ डटी रही तो घुड़सवार पुलिस ने घोड़े दौड़ा कर सत्याग्रहियों को घोड़ों से कुचल डाला।
हरनारायण, नियामतुल्ला सहित चार क्रांतिकारियों को घुड़सवार पुलिस ने कुचल डाला था। वह बताते हैं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र हर नारायण अंग्रेजों के विरोध के बाद भी तिरंगा लिए डटे रहे। अंग्रेज सैनिकों ने घोड़ों से उनको तब तक कुचला, जब तक हर नारायण के प्राण-पखेरू नहीं उड़ गए।