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Independence day 2023 : सीने पर गोली खाकर वतन पर मिटने वाले अपने ही शहर में गुमनाम, न स्मारक न मूर्तियां

Sat, 12 Aug 2023 03:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

सीएवी कॉलेज के छात्र त्रिलोकीनाथ कपूर का नाम ऐसे ही आजादी के दीवानों में से एक है। ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में निकले जुलूस में शामिल वीर त्रिलोकी नाथ कपूर वंदे मातरम का जयघोष करते सीने पर गोली खाकर शहीद हो गए थे।
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भारतीय तिरंगा - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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वतन पर मिटने वाले अमर शहीदों की कुर्बानी का इस जमाने ने क्या सिला दिया, इसे जानकर किसी को भी हैरानी होगी। जानसेनगंज, चौक और शाहगंज मोहल्लों में जिन भारत माता के सपूतों ने सीने पर गोलियां खाईं और तिरंगे को झुकने नहीं दिया, वो अमर शहीद इस शहर में गुमनाम हो गए हैं। ऐसे बलिदानियों के नाम पर स्मारक बनाना तो दूर उनकी मूर्तियां भी नहीं लगाई जा सकी हैं। सरकार ने ऐसे शहीदों की स्मृतियों को सहेजने के लिए कुछ भी नहीं किया है।

सीएवी कॉलेज के छात्र त्रिलोकीनाथ कपूर का नाम ऐसे ही आजादी के दीवानों में से एक है। ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में निकले जुलूस में शामिल वीर त्रिलोकी नाथ कपूर वंदे मातरम का जयघोष करते सीने पर गोली खाकर शहीद हो गए थे। इसी तरह शाहगंज निवासी अब्दुल मजीद का शौर्य भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है।

अब्दुल मजीद भी भारत माता के जयकारे लगाते हुए हाथ में तिरंगा लेकर जुलूस की अगुवाई कर रहे थे। अब्दुल मजीद की टोली को अंग्रेजी सेना के जवानों ने घेर कर सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन वह न डरे न पीछे हटे। वह भारत माता के जयकारे लगाने लगे और अंग्रेजों ने उनका सीना छलनी कर दिया था।

इसी तरह सीएवी इंटर कॉलेज के छात्र और अहियापुर निवासी भानू वैद्य के पुत्र रमेश मालवीय सिर्फ 14 साल की उम्र में आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। बताते हैं कि बलूच रेजीमेंट के नायक को बालक रमेश मालवीय की फेंकी गई ईट का एक टुकड़ा आंख में लगा। जिस पर सिपाहियों ने रमेश की आंख में गोली मार कर शहीद कर दिया।

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इसी तरह महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में जानसेनगंज के दरबेश्वरनाथ मंदिर के पास से जुलूस निकाला गया था। इस जुलूस को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। प्रयागराज का इतिहास लिखने वाले साहित्यकार अनुपम परिहार बताते हैं कि भीड़ डटी रही तो घुड़सवार पुलिस ने घोड़े दौड़ा कर सत्याग्रहियों को घोड़ों से कुचल डाला।

हरनारायण, नियामतुल्ला सहित चार क्रांतिकारियों को घुड़सवार पुलिस ने कुचल डाला था। वह बताते हैं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र हर नारायण अंग्रेजों के विरोध के बाद भी तिरंगा लिए डटे रहे। अंग्रेज सैनिकों ने घोड़ों से उनको तब तक कुचला, जब तक हर नारायण के प्राण-पखेरू नहीं उड़ गए।

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