इलाहाबाद (ब्यूरो)। माघ मेला सिर पर है, लेकिन नालों और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से गंदा पानी गंगा में जाने से अब तक नहीं रोका जा सका है। इसकी वजह से गंगा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है। गंगा में शास्त्री पुल के नीचे और मुख्य संगम पर बायो-केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा तय मानक से एक मिलीग्राम प्रतिलीटर या उससे अधिक बढ़ गई है। अगले कुछ दिनों में कल्पवासियों का भी आना शुरू हो जाएगा, जो पूरे माह मेला में रहेंगे। उन्हें दूषित गंगा जल में ही डुबकी लगानी होगी।
स्नान योग्य गंगा जल में बीओडी का मानक तीन मिलीग्राम प्रति लीटर है, लेकिन शास्त्री पुल के नीचे गंगा में इसकी मात्रा तेजी से बढ़ रही है। यहां सलोरी नाले सहित एसटीपी का पानी भी पहुंचता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक गंगा में इस स्थान पर बीओडी की मात्रा छह जनवरी तक 4.4 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है। शास्त्री पुल से कुछ आगे ही मुख्य संगम है। यहां बीओडी का स्तर चार मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि सलोरी नाले और एसटीपी से बिना ट्रीटमेंट के चोरी-छिपे गंदा पानी सीधे गंगा में छोड़ा जा रहा है।
वैसे भी इस एसटीपी की क्षमता 29 एमएलडी गंदे पानी के ट्रीटमेंट की है, लेकिन यहां इससे कहीं अधिक गंदा पानी पहुंच रहा है। ट्रीटमेंट के बाद शेष पानी सीधे गंगा में जा रहा है। वर्तमान में यहां 14 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट का विस्तार हो रहा है, लेकिन इस प्लांट के पूरा होने में अभी समय लगेगा, तब तक यहां से गंदा पानी गंगा में जाना तय है।